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कुमकुम भान्ती बनी बेटियों के लिए मिसाल

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एटा की शिक्षिका कुमकुम भांती का हुआ दिल्ली में सम्मान साथ में मौजूद शामिल अतिथि
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एटा। प्रधानमंत्री मोदी के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ नारे को सार्थक करने वाली शिक्षिका कुमकुम बेटियों के लिए मिसाल बन गई हैं। इनका संघर्ष महिलाओं को प्रेरणा देता है कि हिम्मत मत हारो, बेटियां किसी से कम नहीं हैं।
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रविवार को शिकोहाबाद रोड स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका कुमकुम भांती को 44 वर्ष से अधिक की सरकारी सेवाओं के लिए इंडियन बुक ऑफ रिकार्ड दिल्ली की ओर से सम्मानित किया। बता दें, कुमकुम का जीवन संघर्षमय रहा। 17 वर्ष की उम्र में ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया। घर में विधवा मां के अलावा छोटी बहिन की जिम्मेदारी भी उनके ऊपर थी।

18 वर्ष की आयु पूरी होते ही उन्होंने पिता की अनुकंपा नौकरी शुरू कर दी और सेवा में रहते हुए प्राइवेट बीए, एमए एवं विभागीय सहयोग से बीटीसी भी की। इसके बाद वे शिक्षिका बन गईं। बेटी के रूप में परिवार संभाल रही कुमकुम के सामने ससुराल की चुनौतियां भी कुछ कम नहीं थीं। आर्थिक विपन्नता से जूझ रहे ससुराल की जिम्मेदारियां भी उन्हें ही संभालनी पड़ी। बच्चों की परवरिश मायके एवं ससुराल की जिम्मेदारियों के बाद भी वे शिक्षिका के रूप में भी बच्चों के साथ न्याय करती रहीं।
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