आगरा। इन दिनों यमुना लबालब दिखाई दे रही है। मगर, पिछले साल के अधिकतम जलस्तर को अब तक नहीं छू पाई है। इस साल नदी का जलस्तर लगभग साढ़े चार फुट कम रहा। सबसे अधिक जलस्तर जुलाई के आखिर से अगस्त के मध्य तक रहता है। गोकुल बैराज से भी इस बार कम पानी छोड़ा गया। सिंचाई विभाग के अनुसार, शुक्रवार से नदी का जलस्तर और गिरने लगेगा।
यमुना सालभर नाले का रूप में बहती है। इसमें पानी कम और सिल्ट ज्यादा नजर आता है। पानी की इतनी कम मात्र रहती है कि सिल्ट युक्त पानी को साफ करने के लिए वाटर वर्क्स की मशीनें तक हांफ जाती हैं। जुलाई-अगस्त में बारिश के दिनों में यमुना अपने उफान पर आती है। मगर, इस साल तो इन दिनों में भी कालिंदी की लहरों की कल-कल नहीं सुनाई दी, जबकि पिछले साल खतरे के निशान से सिर्फ दो फुट नीचे तक जलस्तर पहुंच गया था।
सिंचाई विभाग के कंट्रोल रूम के रिकार्ड के अनुसार, पिछले साल अधिकतम जलस्तर 493 फुट था। इस साल अब तक सबसे अधिक जलस्तर छह अगस्त को 489.6 फुट रहा। बता दें कि वर्ष 2010 में यमुना खतरे के निशान को पार कर गई थी।