अधिवक्ता जैन ने बताया कि उत्तरी बाईपास पूरी तरह चालू हो चुका है लेकिन भारी वाहन शहर के बीच से गुजारे जा रहे हैं। जनता के धन से बनाई गई सड़क का उपयोग उद्देश्य के लिए होना चाहिए। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि उत्तरी बाईपास 4 दिसंबर को चालू हुआ था। यह 14 किलोमीटर लंबा है। यह रास्ता दिल्ली से कानपुर और आगे जाने वाले वाहनों के लिए प्रमुख है। जो भारी वाहन आगरा नहीं जा रहे हैं, वह शहर में प्रवेश नहीं करेंगे, लेकिन प्रतिदिन 50 हजार भारी वाहन आगरा के सिकंदरा क्षेत्र से हुए एत्मादपुर के बीच से गुजर रहे हैं। वाहनों के स्कूलों, अस्पतालों, बस अड्डों, सब्ज़ी मंडियों, रिहायशी इलाकों और ऐतिहासिक स्मारकों के बीच से निकलने की वजह से सड़क हादसों का खतरा लगातार बना रहता है। मथुरा और आगरा जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई की जरूरत है।
टोल टैक्स बचाने का चक्कर
अधिवक्ता ने बताया कि मथुरा की तरफ से आ रहे वाहनों को फरह पर टोल टैक्स देना होता है। रैपुरा जाट से उत्तरी बाईपास है। इस पर वर्तमान में कोई टैक्स नहीं है। मगर भविष्य में टैक्स लगाने की तैयारी चल रही है। दो स्थान पर टैक्स कटवाने के बाद भारी वाहन खंदौली होते हुए यमुना एक्सप्रेस वे पर आएंगे। यहां तीसरी बार टैक्स लगेगा। इस पर अधिवक्ता ने मांग की कि उत्तरी बाईपास से गुजरने वाले वाहनों का एक ही स्थान पर टैक्स लगना चाहिए। बार-बार टैक्स से बचने के लिए चालक आगरा होकर अपने वाहनों को निकालते हैं। उन्होंने दूरी के अनुसार शुल्क वसूलने या एकीकृत शुल्क व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया।