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पनवारी कांड: जेल में बंद 32 दोषियों को मिली राहत...हाईकोर्ट ने दी जमानत, गांव में खुशी की लहर

Tue, 02 Sep 2025 09:55 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चर्चित पनवारी कांड के बाद कागाराैल में भड़की हिंसा के 32 अपीलकर्ताओं की दोषसिद्धि को निलंबित करते हुए जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। इससे कागाराैल में खुशी की लहर है।
 
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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34 साल पुराने चर्चित पनवारी कांड के बाद अकोला में भड़की हिंसा के 32 दोषियों को हाईकोर्ट से राहत मिलने पर कागाराैल के गांव अकोला और ऊदर थोक में खुशी की लहर दाैड़ गई। इस मामले में सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई होना बाकी है। वहीं दो अपीलकर्ता राजकुमार और गोपाल की जमानत पर सुनवाई बुधवार को होगी। एक दोषी नंगा ने कोर्ट में समर्पण नहीं किया है।
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सिकंदरा के गांव पनवारी में 22 जून 1990 को अनुसूचित जाति के परिवार की बेटी की बरात चढ़ाने के विवाद में हिंसा भड़क गई थी। चोखेलाल जाटव की बेटी मुंद्रा की बरात आनी थी। 21 जून को जाट समाज के लोगों ने बरात चढ़ाने का विरोध किया। इस कारण बरात नहीं चढ़ सकी। दूसरे दिन पुलिस की माैजूदगी में बरात चढ़ाई जा रही थी, तभी लोगों की भीड़ ने बरात को रोका था। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए बल प्रयोग किया था। फायरिंग में गोली लगने से सोनीराम जाट की माैत हो गई थी। इस मामले में सिकंदरा थाने में केस दर्ज हुआ था।

 

इसके बाद आसपास के क्षेत्र में हिंसा भड़क गई थी। 24 जून 1990 को अकोला में दोपहर एक बजे अनुसूचित जाति और जाट समाज के लोग आमने-सामने आ गए थे। एक महिला की माैत हो गई थी और 150 से अधिक घायल हो गए थे। थाना कागाराैल के तत्कालीन एसओ ओमप्रकाश राणा ने 200 से अधिक के खिलाफ केस दर्ज कराया था। दोषियों की ओर से हाईकोर्ट में पैरवी अधिवक्ता कुलदीप चाहर ने की। उन्होंने बताया कि सभी दोषी 65 की उम्र पार कर चुके थे। वहीं एससी-एसटी एक्ट की धारा 3 (1) (10) का कोई आधार नहीं था। इस कारण इस धारा में चार्ज नहीं बन रहे थे। सभी ट्रायल के दाैरान भी जमानत पर थे। उन्होंने हाईकोर्ट में अपने तर्क दिए।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चर्चित पनवारी कांड के बाद कागाराैल में भड़की हिंसा के 32 अपीलकर्ताओं की दोषसिद्धि को निलंबित करते हुए जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव की एकलपीठ ने जयदेव और 31 अन्य की अपील पर दिया है।

इनको मिली जमानत
जयदेव, राजेंद्र, पप्पू, तेजवीर सिंह, बन्नो, जीतू उर्फ जीतीराम, कुंवर पाल, कल्लो, श्यामवीर, लीलाधर, भूपेंद्र, सत्तो, महेश, नाहर सिंह, रामवीर, सरेंद्र, रामजीत, निरंजन, हरभान, पूरण सिंह, देवी सिंह, उम्मेदी, विज्जो, रामजीत, महेंद्र सिंह, संतो उर्फ संतराम, सुजान, सूडान उर्फ सौदान, महताब, दंगल, रज्जो उर्फ राजू और संपत को हाईकोर्ट से जमानत मिली है।

 
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कब क्या हुआ
-21 जून 1990 को पुलिस की मौजूदगी में बरात नहीं चढ़ सकी।
-22 जून को 1990 को बरात चढ़ने के दौरान बवाल हो गया।
- 24 जून 1990 थाना कागारौल के अकोला में 200 से अधिक लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ था।
- 1994 में कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल हुआ।
- 28 मई 2025 को कोर्ट ने 35 को दोषी करार दिया।
- 30 मई 2025 को कोर्ट ने 35 दोषियों को सजा सुनाई

सिकंदरा थाने में दर्ज केस में बरी हो गए थे आरोपी
सिकंदरा थाने में दर्ज केस में 4 अगस्त 2022 को एमपी-एमएलए कोर्ट ने भाजपा विधायक चौधरी बाबूलाल सहित आठ को दोषमुक्त करार दिया था। इससे विवेचना से अभियाेजन की पैरवी तक सवाल खड़े हुए थे। कागाराैल के केस में 35 पर दोष सिद्ध हुआ था। इसी मामले में अदालत ने सब्बो, कुशलपाल, रामपाल, राजो, वीरी सिंह, भूरा उर्फ निरोत्तम, रुगधो, रणवीर सिंह, सूखी, बलवीर, जालिम सिंह, देवो, सीताराम, बनै सिंह, करतो उर्फ करतू को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया।
 
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