एटा। जिले की रोडवेज बसों में चल रहे फर्जी टिकट के खेल पर परिवहन निगम के अधिकारी ही पर्दा डालते रहे। रोडवेज बसों में बड़े पैमाने पर संचालित हो रहे फर्जी टिकट के रैकेट को रोकने के लिए जिले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में निगम को रोज लाखों रुपये का चूना लग रहा है। वहीं एक आरटीआई कार्यकर्ता ने एसटीएफ को पत्र लिखकर मामले की जांच की मांग की है।
जिले में यात्रियों को फर्जी टिकट देकर रोडवेज को लाखों रुपये का घाटा कराया जा रहा है। आलम यह है कि पिछले दिनों फर्जी टिकट बांटने की वीडियो वायरल होने की जानकारी होने पर भी निगम अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। मामले की जांच एक अधिकारी को सौंपकर खानापूर्ति कर दी गई।
बताया जाता है कि रोडवेज के तमाम परिचालक बड़े स्तर पर जिले में फर्जी टिकट के खेल को अंजाम दे रहे हैं, लेकिन निगम अधिकारियों को कार्रवाई करने की फुर्सत नहीं है। आरटीआई कार्यकर्ता सुनील कुमार ने एसटीएफ के अधिकारियों को पत्र लिखकर एटा डिपो में चल रहे खेल की जांच के साथ दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने पत्र के साथ फर्जी टिकट के तमाम साक्ष्य भी एसटीएफ को भेजे हैं। अगर मामले में जांच होती है, तो बड़े खेल का खुलासा होना तय है।
बहाल कर दिए परिचालक
जिले में दो साल पहले बिना टिकट यात्रियों को बस में यात्रा कराने के मामले में छह परिचालकों की सेवा समाप्त की गई थी, लेकिन सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक ने बिना आदेश सभी परिचालकों को बहाल कर दिया। जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक परिचालकों को क्षेत्रीय प्रबंधक की संस्तुति पर बहाल किया जा सकता है।