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फिरोजाबाद: एक माह बाद भी डेंगू बना रहा रिकार्ड, सौ शैय्या अस्पताल में जांच के दौरान 273 नए मरीज मिले

Thu, 23 Sep 2021 01:33 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद

सार

फिरोजाबाद में डेंगू-वायरल से अब तक दो सौ से अधिक की मौत हो चुकी है। इनमें बच्चों की संख्या भी काफी है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा भेजी गई टीमों के निरीक्षण के बाद भी डेंगू और वायरल के मरीजों की संख्या में गिरावट नहीं आई है।
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फिरोजाबाद: सरकारी अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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फिरोजाबाद में एक महीने से अधिक समय गुजर चुका है। लेकिन डेंगू और वायरल बुखार कम नहीं हो रहा है। पिछले 24 घंटे में सौ शैय्या अस्पताल में कराई 743 मरीजों की रैपिड जांच में 273 में डेंगू की पुष्टि हुई है। हालांकि 50 हजार से कम प्लेटलेट्स वाले मरीजों को ही अस्पताल में भर्ती किया जा रहा है। शेष मरीजों को दवा देकर घर पर ही इलाज देने की सलाह दी जा रही है। बुधवार को करीब तीन सौ मरीज भती थे। 74 मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया।

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सौ शैय्या अस्पताल में हुई डेंगू जांच में 24 घंटे में 273 मरीज मिले हैं। जबकि निजी पैथोलॉजी पर हो रही जांच में भी बड़ी संख्या में डेंगू की पुष्टि हो रही है। डेंगू का बुखार तीन से पांच दिन तक रह रहा है। ऐसे में मरीजों के साथ परिजनों को तकलीफ उठानी पड़ रही है। सौ शैय्या अस्पताल के बाहर लोग बारिश में भीगते हुए ही अपने बच्चों को दवा दिलाने के लिए दौड़े-दौड़े नजर आ रहे हैं। निजी चिकित्सकों के क्लीनिक पर नजर डालें तो बाल रोग विशेषज्ञ एक दिन में 400 से 500 मरीजों ओपीडी कर रहे हैं। जबकि गली, मोहल्लों में क्लीनिक पर भीड़ नजर आ रही है। 

मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. संगीता अनेजा का कहना है कि डेंगू के मरीज 294 से ज्यादा सौ शैय्या अस्पताल में भर्ती हैं। मरीजों को अच्छा इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। वार्डों में पहले से कम मरीजों की संख्या हो गई है। 
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आधी रात तक खुल रही पैथोलॉजी और क्लीनिक
फिरोजाबाद शहर में पैथोलॉजी रात्रि 12 से एक बजे तक खुल रही हैं। जबकि निजी चिकित्सक 11 बजे तक अपने क्लीनिकों पर ड्यूटी दे रहे हैं। इसके बाद अस्पतालों में भर्ती मरीजों का हालचाल लेने को जा रहे हैं। चिकित्सक भी मान रहे हैं कि स्थिति अभी काबू में नहीं आ सकी है। 

गली-मोहल्ला क्लीनिकों ने बढ़ाया स्टाफ
गली-मोहल्ला क्लीनिक संचालकों ने स्टाफ बढ़ा दिया है। वह अपने क्लीनिकों पर खुद इलाज कर रहे हैं। जबकि घर-घर ड्रिप चढ़ाने के लिए भी प्राइवेट चिकित्सकों ने स्टाफ बढ़ा दिया है। उनमे अधिकांश स्टाफ ऐसा हैं जो न तो इंजेक्शन लगाना जानते हैं और न ही इंट्राकैथ। सिर्फ घर-घर जाकर ड्रिप बदलने का कार्य दिया है।

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