घिरोर में खाद की दुकान पर लगी किसानों की भीड़।
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मैनपुरी। आलू और सरसों की बुवाई में डीएपी की किसानों को जरूरत है। लगातार डीएपी की रैक भी आ रही हैं, लेकिन इसके बाद भी किसानों को डीएपी नहीं मिल पा रही है। बीते एक सप्ताह में 2650 मीट्रिक टन डीएपी आई।
जिले में लगातार किसान डीएपी न मिलने और ओवर रेटिंग होने की शिकायतें कर रहे हैं। वहीं प्रशासन का दावा है कि अब भी दुकानों पर ढाई हजार मीट्रिक टन से अधिक डीएपी बिक्री के लिए उपलब्ध है। बीते एक सप्ताह में दो बार डीएपी की रैक भी जिले को मिली। इसमें 28 अक्तूबर को आईपीएल की 1350 मीट्रिक टन की एक रैक और 29 अक्तूबर को मौजेक की 1352 मीट्रिक टन की एक रैक प्राप्त हुई। वहीं पूर्व से भी डीएपी का दुकानों पर स्टॉक था।
इसके बाद भी जिले में डीएपी की किल्लत कम होने का नाम नहीं ले रही है। सुबह से ही समितियों पर किसानों की लाइनें लग रही हैं तो वहीं दुकानों से भी किसान लौटाए जा रहे हैं। हाल ये है कि किसान अधिकारियों से लगातार डीएपी न मिलने या ऊंचे दामों पर मिलने की शिकायतें कर रहे हैं।
डीएपी की कमी की लगातार शिकायतों को ध्यान में रखते हुए अब सीडीओ विनोद कुामर ने उप जिलाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में उपलब्ध हो रही डीएपी के वितरण की लगातार मॉनीटरिंग करने के आदेश दिए हैं।
घिरोर में शनिवार को क्षेत्र की सहकारी समितियों और दुकानों पर खाद पहुंचने के बाद सुबह से ही लाइनें लग गईं। तीन से चार घंटे तक लाइन में इंतजार करने के बाद लोगों को डीएपी मिल सकी। दिन भर लोग भूखे-प्यासे यहां परेशान होते रहे। सभी उर्वरक की दुकानों पर यही हालात रहे।
जिले में भरपूर मात्रा में डीएपी उपलब्ध है। इसके साथ ही रैक भी लगातार आ रही हैं। सभी किसानों को डीएपी उपलब्ध कराई जाएगी।
डॉ. सूर्यप्रताप सिंह, जिला कृषि अधिकारी