फिरोजाबाद। सुहागनगरी की 222 इकाइयां 25 वर्ष से गैस सप्लाई के इंतजार में हैं। समय से गैस सप्लाई न होने के कारण ये बंद होने के कगार पर हैं। इन इकाइयों में से 66 ने गैस सप्लाई के लिए उद्योग विभाग से दोबारा गुहार लगाई। उद्योग बंधु की बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। औद्योगिक संगठनों द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने के बाद संबंधितों के आवेदन जरूरी कार्रवाई को टीटीजेड अथॉरिटी को अग्रसारित किए गए हैं।
वर्ष 1996 तक उद्योग विभाग में कुल 410 इकाइयां पंजीकृत थीं। कोयला से संचालित इन इकाइयों को टीटीजेड अथॉरिटी गठन के बाद प्राकृतिक गैस ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने का मौका दिया लेकिन इनमें से 198 इकाइयों ने ही गेल गैस इंडिया से अनुबंध कर गैस सप्लाई प्राप्त कर ली। शेष 222 इकाइयां कुछ कारणों खास तौर पर अनुबंध से जुड़ी जरूरी औपचारिकताएं पूर्ण नहीं करा सकीं। इन इकाइयों को टीटीजेड एरिया से बाहर जाने, गैस सप्लाई से जुड़ी औपचारिकताएं पूर्ण कराने एवं यूनिट बंद करने जैसे विकल्प दिए गए लेकिन समय उचित निर्णय नहीं लेने के कारण उक्त सभी इकाइयां आज भी जस की तस स्थिति में खड़ी हैं। 25 वर्ष बंदी जैसे हालतों से गुजर रहीं उक्त 222 में से कई इकाइयों का अस्तित्व ही खत्म हो चुका है जबकि 66 इकाइयों ने दोबारा शुरू की गैस सप्लाई प्राप्त करने को आवेदन किए हैं।
यह इकाइयां झेल रहीं 25 वर्ष से बंदी का दंश
1996 में गैस अनुबंध कराने में विफल रहीं इकाइयों में वसुंधरा पोटरीज, अनिल कुमार-रमेश चंद्र ग्लास वर्क्स, लक्ष्मी ग्लास वर्क्स, हनुमान ग्लास वर्क्स, एमयू ग्लास वर्क्स, नगीना ग्लास, नवीन केमिकल, आजाद ग्लास आदि के नाम शामिल हैं।
इनकी उम्मीदों को भी लग चुका है झटका
करीब एक वर्ष पूर्व टीटीजेड अथॉरिटी की बंदिशों में ढील के दौरान तत्कालीन मंडलायुक्त आगरा ने हाई लाइट, आईबी ग्लास, मीरा ग्लास आदि को जरूरी औपचारिकताएं पूर्ण कराने की स्थिति में गैस कनेक्शन जारी करने के निर्देश जारी कर दिए। सुप्रीम कोर्ट के 2015 में जारी यथा स्थिति बनाए रखने संबंधी आदेशों के फलस्वरूप गैस सप्लाई पर ब्रेक लग गए।
चालू हालत वाली सभी कांच व चूड़ी इकाइयों को गैस अनुबंध कराने को पूरा मौका मिला था जो इकाईयां अनुबंध नहीं कर सकीं। उन्हीं को गैस कनेक्शन जारी नहीं हुए। जिन इकाइयों ने हाल ही गैस सप्लाई से जुड़ी औपचारिकता पूर्ण कर ली हैं। उनके आवेदन अंतिम निर्णय के लिये टीटीजेड अर्थोरिटी को अग्रसारित किए हैं।
अमरेश पांडे, उपायुक्त उद्योग