जिलाधिकारी सीपी सिंह ने पशु चिकित्सा विभाग, राजस्व विभाग और निकायों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि गोवंशों की देखरेख में सतर्कता बरतें और परीक्षण के बाद ही चारा खिलाएं।
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वहीं बदायूं जिले की उझानी कोतवाली की पुलिस ठेकेदार से पूछताछ करने के लिए सोरों आई और उसे हिरासत में लेकर उझानी कोतवाली ले गई। पुलिस ने दो अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।
बदायूं जिले के कृषि विभाग की एक टीम भी सोरों के समीप लहरा रोड पर उस खेत पर पहुंची जहां से हरा चारा बदायूं भेजा गया था। कृषि विभाग की टीम ने मिट्टी में केमिकल की जांच के लिए नमूने संकलित किए हैं। साथ ही भेजा गया चारा भी जांच के लिए बरेली प्रयोगशाला भेज दिया गया है।
वैसे तो बाजरा के चारे में नाइट्रेड अधिक होता है, लेकिन जो चारा खाने से गोवंशों की मौत हुई है उसमें काफी अधिक मात्रा में नाइट्रेड था। बरेली आईबीआरआई के वैज्ञानिकों ने पाया है कि चारे में नाइट्रेड अधिक थी।
बिना बाली आए ही चारा खेत से काटकर गोवंशों को खिलाया गया। खेत में यूरिया के अधिक प्रयोग से नाइट्रेड बढ़ जाता है। अपर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. एके सगर ने बताया कि चारे में यदि क्षमता से अधिक नाइट्रेड है तो वह जहर बन जाता है। पशुओं में फूड प्वाइजनिंग का यह कारण भी हो सकता है।
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पशु चिकित्सा विभाग ने माना है कि जिस ठेकेदार ने बदायूं की कछला गोशाला के चारे की आपूर्ति दी वह कासगंज की कुछ गोशालाओं में भी चारा आपूर्ति करता है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. राजेंद्र सिंह खोखर ने अधीनस्थों को पत्र जारी किया कि संबंधित ठेकेदार से चारा न खरीदें।
टीम भेजकर सोरों से नमूने संकलित कराए हैं। मिट्टी में केमिकल की जांच कराई जाएगी। नमूने प्रयोगशाला भेज दिए हैं। जल्द ही जांच रिपोर्ट आ जाएगी। हो सकता है कि मिट्टी की जांच से सोरों में पैदा हुए जहरीले चारे की जानकारी हो जाए।
-विनोद कुमार, कृषि अधिकारी, बदायूं।