एटा। एक ओर प्रदेश सरकार लोगों को अच्छी चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने का वादा कर रही है, तो दूसरी ओर जिले में नवजात सर्दी के सितम से जूझ रहे हैं। जिला महिला अस्पताल में संसाधनों के अभाव और जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि अस्पताल मेें जहां खिड़की, दरवाजे टूटे पड़े हैं। वहीं वार्डों में हीटर और सर्दी से बचने के इंतजाम नहीं हैं।
दरअसल, गुरुवार को गंजडुंडवारा में सर्दी में कंबल नहीं होने से नवजात ने तड़पकर दम तोड़ दिया था। इसे लेकर शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने जिला महिला अस्पताल की पड़ताल की। इस दौरान अस्पताल के वार्ड के हालात ने चौंका दिया।
ठंड से परेशान हैं साहब
महिला वार्ड के बेड पर भर्ती हिम्मतपुर बझेरा की भारती ने को गुरुवार शाम बेटी को जन्म दिया है। उनको शुक्रवार को वार्ड में शिफ्ट किया गया। वार्ड का आलम देख भारती की दिक्कत बढ़ गई। भारती ने बताया कि बेड के पास स्थित खिड़की का कांच टूटा पड़ा है। इससे सीधी हवा अंदर आती है। खिड़की को बंद करने के लिए कहा, मगर कोई सुनने वाला नहीं है। इमरजेंसी वार्ड में कंबल था, मगर यहां कोई कंबल नहीं दिया गया।
ताकि नवजात को नहीं लगे सर्दी
पपैरा गांव की कमलेश को भी गुरुवार शाम को भर्ती कराया गया है। कमलेश ने बताया कि उनकी नवजात बेटी को सर्दी नहीं लगे इसके लिए घर से ही कंबल और रजाई मंगाई है। वार्ड में हीटर और सर्दी से बचने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। नवजात को ठंड से बचाने के लिए खुद ही कोशिश कर रहे हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं की गई।
वार्ड का हाल बदहाल
सामान्य वार्ड का हाल-बदहाल है। आलम यह है कि वार्ड के गेटों की खिड़कियां निकल गई हैं। इससे शीत लहर वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए परेशानी का सबब बनती है।
हीटर की नहीं है व्यवस्था
जिला महिला अस्पताल में हीटर की भी व्यवस्था नहीं है। हालांकि अस्पताल प्रशासन हीटर लगाने की बात कह रहा है, लेकिन पड़ताल के दौरान वार्ड में हीटर नजर नहीं आया।