कासगंज। सपा ने निकाय चुनाव के लिए फिर से अपनी स्थिति मजबूत करने को मुस्लिम कार्ड खोल कर अन्य पार्टियों पर बढ़त तो बना ली है, लेकिन फिर भी उसकी राह इतनी आसान नहीं हैं। पार्टी का यह दाव कितना सफल होगा यह तो मतगणना के बाद ही निर्धारित हो सकेगा। 2012 के चुनाव के बाद से समीकरण काफी बदल गए हैं। इसलिए इस बार के निकाय चुनाव में समाजवादी पार्टी को अपना गढ़ बचाने की सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
जनपद में तीन नगर पालिका एवं सात नगर पंचायत है। समाजवादी पार्टी के लिए वर्ष 2012 का निकाय चुनाव काफी अच्छा रहा। इसमें पार्टी के समर्थन से सोरों, गंजडुंडवारा नगर पालिका एवं भरगैन, सहावर, बिलराम नगर पंचायत में जीत हासिल हुई। जिनमें से तीन प्रत्याशी मुस्लिम थे। इस बार जनपद की तीनों विधान सभा एवं सांसद की सीट भाजपा के पास होने से चुनावी समीकरण काफी बदल हुए हैं। यही देखते हुए सपा ने अपनी सीटों को बरकरार रखने एवं नई सीटों पर भी जीत हासिल करने के लिए पार्टी ने 10 में से नौ निकायों पर अपने प्रत्याशी घोषित करने में काफी सावधानी बरती है।
वहीं कुछ सीटों पर आरक्षण बदल जाने से पार्टी को नए चेहरे तलाशने पडे़ हैं। पार्टी ने जिन सीटों पर पहले प्रत्याशी जीते हैं उनमें से किसी पर भी भरोसा नहीं जताया। सभी नए चेहरे चुनाव मैदान में उतारे हैं। पार्टी ने अपने परंपरागत वोट मुस्लिम पर फिर से विश्वास किया है। जनपद में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी अच्छी है। सभी सीटों पर मुस्लिम मतदाता अच्छी तादाद में है। इन सीटों के सहारे अन्य सीटों को भी साधने का प्रयास किया गया है। महिला आरक्षित कासगंज सीट से वैश्य प्रत्याशी मैदान में उतारा है। सोरों अनुसूचित जाति महिला एवं बिलराम अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। जबकि मोहनपुर अनारक्षित है।