आगरा के थाना खंदौली क्षेत्र के गांव बास मोहन सहाय में बुधवार तड़के आयुष (20) का शव पेड़ पर फंदे से लटका मिला। माता-पिता पहले ही दिवंगत हो चुके थे। वह ननिहाल में रह रहा था। ननिहाल पक्ष ने संपत्ति विवाद में ताऊ के परिवार पर हत्या कर शव लटकाने का आरोप लगाया। जलेसर मार्ग पर पुलिस चौकी के सामने शव रखकर दो बार हंगामा किया। घंटों जाम लगा रहा। एसीपी ने तहरीर लेकर कार्रवाई का आश्वासन दिया, तब परिजन माने।
गांव बांस मोहन सहाय निवासी आयुष चाैहान ने इस साल इंटरमीडिएट किया है। वह पेठे की दुकान पर भी काम करता था। मामा दीपक ने बताया कि आयुष की मां मंजू देवी की सात साल पहले और पिता मोहन सिंह की 3 साल पहले बीमारी से मृत्यु हो गई थी। तब से वो गांव बहरामपुर में उनके घर रह रहा था।
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मंगलवार शाम 6 बजे किसी का फोन आने पर घर से निकल गया। जाते समय कहा था कि रुपये लेने जा रहा हूं। इसके बाद नहीं लौटा। रात तकरीबन 8 बजे मोबाइल स्विच ऑफ बता रहा था। रात 12 बजे पुलिस के पास पहुंचकर जानकारी दी। बुधवार सुबह करीब 5:30 बजे जानकारी मिली कि आयुष का शव बांस मोहन सहाय में पेड़ पर रस्सी के सहारे फंदे से लटका है।
इस पर बड़ी संख्या में परिजन पहुंच गए। ननिहाल पक्ष ने ताऊ शिुशपाल, उनके बेटे और पत्नी पर हत्या कर शव फंदे से लटकाने का आरोप लगाया। सूचना के एक घंटे बाद पुलिस पहुंची। सुबह करीब 8:30 बजे परिजन शव को मुड़ी चाैराहे पर ले आए और पुलिस चाैकी के बाहर रखकर हंगामा कर दिया।
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मामा रूपम सिंह ने कहा कि हत्या को आत्महत्या दर्शाने के लिए शव को पेड़ पर लटका दिया गया। एक घंटे तक जाम लगाए रखा। जलेसर मार्ग पर वाहनों की कतार लग गई। पुलिस ने वाहनों को डायवर्ट किया। बाद में एसीपी एत्मादपुर पियूष कांत राय पहुंचे और उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया।
इसके बाद दोपहर करीब 3 बजे पोस्टमार्टम के बाद शव पहुंचने पर परिजन फिर हंगामा करने लगे। गिरफ्तार नहीं करने का आरोप लगाया। जलेसर मार्ग पर शव रखकर जाम लगा दिया। एसीपी ने पहुंचकर शांत कराया। उन्होंने बताया कि मृतक के ताऊ, उनके बेटे और पत्नी के खिलाफ हत्या की तहरीर दी गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
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जमीन का ताऊ से था विवाद
मामा दीपक ने बताया कि गांव में आयुष के हिस्से में 20 बीघा से अधिक जमीन आ रही थी। हिस्से के लिए ताऊ से काफी समय से विवाद चल रहा था। दो साल में कई बार पंचायत हुई थी। परिजन से समझौता हुआ। आयुष के नाम जमीन भी दर्ज हो गई थी। मगर, परिवार के लोग उसे हिस्सा नहीं देना चाहते थे। आयुष का जन्म ननिहाल में ही हुआ था। माता-पिता की मृत्यु के बाद वह यहीं रह रहा था। एक साल से काम करने के साथ पढ़ाई भी करता था।