एटा। तीन साल से चल रही कवायद के बाद मंगलवार को जिला खुले में शौच मुक्त घोषित किया जाएगा। जिला प्रशासन ने ओडीएफ को लेकर कार्यक्रम की तैयारियां कर ली हैं। मगर हकीकत यह है कि जिले में अभी भी शौचालयों का निर्माण चल रहा है। शासन के दबाव और लगातार हो रही देरी को लेकर आनन फानन में जिले को खुले में शौच मुक्त घोषित करने की कवायद की जा रही है।
जिले को खुले में शौच मुक्त घोषित करने के लिए बीते तीन साल से कवायद की जा रही है। प्रशासन का दावा है जिले में महज 44 शौचालयों का निर्माण अधूरा है, लेकिन हकीकत से हर कोई वाकिफ है। तमाम गांवों में अभी तक शौचालयों का निर्माण शुरू ही नहीं हुआ है। जबकि कई गांवों को फर्जी रिपोर्टिंग कर ओडीएफ कर दिया गया है। मगर शासन के निर्देशों को लेकर जिला प्रशासन ने आनन फानन में मंगलवार को जिले को खुले में शौच मुक्त घोषित करने की तैयारी की है। मंगलवार को जिला पंचायत सभागार में डीएम की मौजूदगी में जिले को खुले में शौच मुक्त घोषित किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान स्वच्छ भारत मिशन में बेहतर कार्य करने वाले कर्मचारी सम्मानित होंगे।
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784 गांव हुए ओडीएफ
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण की वेबसाइट के मुताबिक जिले में अब तक 855 राजस्व गांवों में से महज 784 गांव ही ओडीएफ हो सके हैं। जबकि 576 ग्राम पंचायतों में 516 ग्राम पंचायतेें ओडीएफ हुई हैं। ऐसे में ओडीएफ को लेकर की जा रही जल्दबाजी लोगों में चर्चा का विषय बनी है।
इनको किया जाएगा सम्मानित
ओडीएफ कार्यक्रम में हर विकास खंड से 80 से 100 प्रतिशत जियो टैग करने वाली ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान, सभी पंचायत सचिव, अच्छा काम करने वाले पांच-पांच स्वच्छाग्राही, खंड प्रेरक, डाटा एंट्री आपरेटर, पांच-पांच सफाई कर्मी और नोडल अधिकारियों को सम्मानित किया जाएगा।
मंडलीय सत्यापन में खुलेगी पोल
जिला प्रशासन के पास जिले को ओडीएफ करने के बाद महज तीन महीने का वक्त होगा। जिसमें मंडलीय टीम सत्यापन करने आएगी। अगर मंडलीय सत्यापन में गांव में शौचालय निर्माण नहीं मिलेगा, तो जिले को ओडीएफ नहीं माना जाएगा।