जिला अस्पताल में दवाएं खत्म, मरीज परेशान
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एटा। दवाओं की कमी से जूझ रहे जिला अस्पताल में एक महीने से मरीजों के लिए जरूरी दवाओं की लोकल खरीदारी बंद है। इसके चलते सैकड़ों मरीज और तीमारदारों को बाजार से दवाईयां खरीदने को मजबूर है। यही नहीं जिला अस्पताल को जीएसटी नंबर मिल गया है, लेकिन ई-टेंडरिंग साफ्टवेयर पर नंबर अपलोड नहीं होने से दवाओं के नए ऑर्डर जारी नहीं हो रहे। ऐसे में मरीजों को दूसरी दवाएं देकर टरकाया जा रहा है।
जिला अस्पताल जरूरी दवाओं की कमी से विगत अप्रैल से जूझ रहा है। पहले नया वित्त वर्ष शुुरू होने के कारण दवाओं का टोटा रहा। इसके बाद जीएसटी नंबर नहीं मिलने से दवाओं की खरीद नहीं हो पाई। जीएसटी नंबर तो शासन ने जारी कर दिया है, लेकिन ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के नए साफ्टवेयर डीवीडीएमएस में जीएसटी नंबर अपलोड नहीं होने से दवाओं के नए इंडेंट जारी नहीं हो रहे। ऐसे मेें मरीजों के लिए दवाओं की किल्लत बढ़ने की संभावना बढ़ गई है।
दवाओं की कमी होने पर जिला अस्पातल में मरीजों के लिए स्थानीय स्तर पर दवाएं खरीदने (लोकल पर्चेजिंग) की व्यवस्था है, लेकिन एक महीने से यह व्यवस्था भी ठप पड़ी है। ठेकेदार का लाखों रुपये रुपये भुगतान लटकने और नए वित्त वर्ष का अनुबंध नहीं होने से ठेकेदार ने जिला अस्पताल प्रशासन को दवाओं की आपूर्ति स्थानीय स्तर पर करने से इनकार कर दिया है। इसके चलते सैकड़ों मरीजों और उनके तीमारदार भटक रहे हैं। विभागीय सूत्रों की माने तो सीएमओ के डिजिटल हस्ताक्षर तैयार नहीं होने के कारण भी दवाओं के नए आर्डर जारी नहीं हो रहे। जबकि विभाग में ई-टेंडर से दवाएं खरीदने के आदेश जारी हो चुके हैं।
कांट्रेक्टर के बिल भुगतान के लिए भेजे जा चुके हैं, लेकिन भुगतान नहीं मिलने से कांट्रेक्टर ने एक माह पहले ही एलपी पर उधार दवाएं देने से मना कर दिया। शासन ने जीएसटी नंबर दे दिया है, लेकिन साफ्टवेयर पर अपलोड नहीं होने से नए ऑर्डर जारी नहीं हो रहे।
एसके दीक्षित, चीफ फार्मासिस्ट, जिला अस्पताल
जिला अस्पताल में दवाओं की लोकल पर्चेज एक महीने से बंद होने का मामला संज्ञान में नहीं है। जल्द ही एलपी शुुरू कराई जाएगी। कुल बजट का दस प्रतिशत लोकल पर्चेज पर खर्च करने का प्रावधान है।
डा. एके यादव, सीएमओ एटा