मथुरा। महानगर में महापौर के चुनाव का गणित आरक्षण ने बिगाड़ दिया। सामान्य जाति के लोग तो मतदान केंद्रों पर कम ही नजर आए। एक बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी थी जो शनिवार को ही बाहर चले गए थे। कोई दिल्ली था तो कोई पहाड़ों की सैर तो गया था।
महानगर में मेयर पद का आरक्षण अनुसूचित जाति के लिए हुआ था। इस आरक्षण ने कइयों के ख्वाब तोड़ डाले थे। जो लोग पिछले कई महीने से मेयर के लिए फील्ड में उतरकर काम कर रहे थे उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया था। आरक्षण के आधार पर भी टिकट मांगने वालों की लाइन लग गई थी। दिल्ली से लखनऊ तक शोर मचने लगा। लेकिन टिकट मुकेश आर्य बंधु को मिला। मुकेश आर्य बंधु पूरी मेहनत के साथ चुनाव लड़े। उनके समर्थन में संगठन भी खड़ा नजर आया।
कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा पूरी ताकत के साथ जुटे रहे लेकिन जिन लोगों को टिकट नहीं मिला उन्होंने खामोशी अख्तियार कर ली। कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा से नाराजगी का मुद्दा भी इस चुनाव में गूंजता रहा। रविवार को जब मतदान हुआ तो सामान्य जाति के लोग मतदान में खुलकर हिस्सा लेते कहीं नजर नहीं आए। कई परिवार तो ऐसे भी थे जो घर के पास मतदान केंद्र होने के बाद भी नहीं पहुंचे।