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कासगंज के विष्णु को मिला दादा साहब फाल्के फाउंडेशन पुरस्कार

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कासगंज के विष्णु को मिला दादा साहब फाल्के फाउंडेशन पुरस्कार - फोटो : अमर उजाला
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कासगंज।
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संगीत की दुनिया में धूम मचाने वाले विष्णु नारायन को रविवार की रात्रि को मुंबई में आयोजित दादा साहब फाल्के फिल्म फाउंडेशन अवॉर्ड बेस्ट म्यूजीशियन के रूप में उन्हें प्रदान किया गया। विष्णु की इस सफलता से उनके परिवार, मित्रों और शहर के लोगों में खुशी का आलम है।
विष्णु के पिता रमेश चंद्र और मां विरमा देवी को कतई इस बात का आभास नहीं था कि उनका बेटा संगीत की दुनिया में धूम मचाएगा। मध्यम वर्गीय परिवार में जन्म लेने वाले विष्णु यहां मोहल्ला नवाब गली नियारियान में रहते थे। बाद में पिता ने यह घर बेचकर दूसरा घर बिलराम गेट पर शिशु मंदिर वाली गली में बनवा लिया।
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ऐसे शुरू हुआ सफर
शहर के स्कूल कॉलेजों में ही उन्होंने शिक्षा ली। बीए की शिक्षा लेते समय उन्हें मुंबई जाने की हूक उठने लगी। 1993 में वह घर वालों की बिना मर्जी के मुंबई गए। 6 महीने तक संघर्ष करने के बाद वह वापस लौट आए, लेकिन उन्होंने अपना हौसला नहीं तोड़ा। 6 महीने रुकने के बाद वह फिर से 1993 में मुंबई चले गए, इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। संघर्ष करते हुए वे आगे बढ़े और मुकाम पाया।
कई हस्तियां गा चुकी हैं उनके लिए गाने
अब वह मुंबई के जाने वाले बेस्ट म्यूजीशियन हैं। उन्होंने 2005 में हॉलीवुड की फिल्म माई बॉलीवुड ब्राइड में संगीत दिया। स्टार गायक सोनू निगम ने गाने गाए। 2006 में चांद के पार चलो हिट फिल्म दी। इसमे उदित नारायन, अलका यागनिक, श्रेया घोषाल, साबरी ब्रदर्स जसविंदर नरूला जैसे ख्याति प्राप्त गायकों को संगीत दिया। इसके बाद 2008 में फिल्म एश्वर्या 2013 में तेरा नाम ए लव स्टोरी, 2017 में हसीना सहित अन्य फिल्मों में हिट संगीत दिया। बिन फेरे फ्री में तेरे कॉमेडी फिल्म में उन्होंने स्वयं भी गाने गाए और संगीत दिया। पंजाबी हिट गीतों पर भी उन्होंने संगीत दिया है। वहीं उन्होंने तमिल, मराठी, बांगला फिल्मों में भी संगीत दिया है। उनकी आने वाली फिल्मों में शादी तो होकर रहेगी, डैथ प्वाइंट, सरहदें आदि फिल्में शामिल हैं।
शहर के संगीत गुरु प्यारेलाल से ली शिक्षा
कासगंज। अमर उजाला से बातचीत में विष्णु ने बताया कि वे संगीत की दुनिया में कामयाबी के लिए नगर अपने गुरु संगीतकार प्यारेलाल को श्रेय देते हैं। उनका कहना है कि वे मेरे गुरु हैं और एक छिपे हुए हीरे हैं। उन्होंने कहा कि संगीत की बारीकियां उन्होंने सिखाईं। उन्होंने बताया कि वे स्वयं मुंबई में कई फिल्मों में हिट संगीत दे चुके हैं। आज भी उनके संगीत की फिल्मी दुनिया और देशभर में धूम है।
फोटो प्रेषित है
माता पिता बोले, विष्णु की सफलता संघर्ष की कहानी
कासगंज । विष्णु नारायन के पिता रमेश चंद्र एवं मां विरमा देवी का कहना है कि विष्णु की सफलता उसके जुनून और संघर्ष का परिणाम है। वे कहते हैं कि उन्हें विष्णु के मुंबई जाने की बात हमेशा अखरती थी। वे मना करते थे, लेकिन 24 साल पहले मुंबई जाने का निर्णय कर लिया और वे केवल एक जोड़ी कपड़े में ही मुंबई गया। उसने काफी संघर्ष किया है। विष्णु उनका ख्याल करता है हर महीने खर्चे का धन भी भेजता है। विष्णु के भाई राम प्रकाश, श्याम प्रकाश और संतोष ने भी खुशी जताई और सफलता पर मिष्ठान वितरण किया।
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बोले गुरु एक अंजान चेहरे के रूप में मिला था विष्णु
कासगंज । संगीतकार विष्णु के संगीत गुुरु प्यारे लाल माहेश्वरी का कहना है कि जब विष्णु 13 वर्ष की अवस्था में एक बार उनकी दुकान पर आकर खड़ा हुआ, लेकिन संकोचवश बिना बात किए हुए चला गया। इसके बाद फिर आया तो उन्होंने उससे पूछा क्या बात है। तब विष्णु ने संगीत सीखने की इच्छा जाहिर की। विष्णु के मन में संगीत सीखने की ललक थी। उसे मैने सिखाया। आज वह मुंबई में बड़े मुकाम पर है उसे पुरस्कार मिला है। यह मेरे लिए गर्व की बात है।
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