अवागढ़। खुद को जिंदा साबित करने की लड़ाई आखिरकार गीतम सिंह हार ही गया। दो साल तक कोर्ट में तारीख करने के बाद गीतम सिंह की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। इस तरह से राजस्व अधिकारियों की लापरवाही के चलते वह अपने आप को कोर्ट में जिंदा साबित नहीं कर सका।
पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे लोगों ने बताया कि वर्ष 2016 में गीतम सिंह के पिता की मौत हो गई थी। इसके बाद पिता की जमीन उसके नाम न आकर उसकी मां के नाम फौती कर दी गई थी। जबकि नियमानुसार उसके नाम पर पिता की जमीन होने चाहिए थे। इसकी जानकारी जब उसने राजस्व विभाग से की तो उसे कर्मचारियों ने मृत घोषित कर दिया था। जबकि वह जीवित था। ऐसे में वह 2016 से खुद को जिंदा साबित करने के लिए कोर्ट में लड़ाई लड़ रहा था। दो साल तक कोर्ट के चक्कर काटने के बाद भी वह खुद को जिंदा साबित नहीं कर सका। इसके बाद रविवार को उसकी मौत हो गई। इस तरह से राजस्व अधिकारियों की चूक किसान पर भारी पड़ी है। परिजनों ने बताया कि मृतक दो भाई था। जिसमें उसके एक भाई की काफी समय पहले मौत हो गई थी। इसके बाद वह माता पिता का इकलौता बेटा था। लोगों ने बताया कि मृतक के तीन बेटे और चार बेटियां है।