एटा। आगरा के दीवानी परिसर में बुधवार को हुई बार काउंसिल अध्यक्ष दरवेश यादव की हत्या को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर वारदात को अंजाम देने वाले आरोपी मनीष शर्मा से दरवेश का विवाद चर्चा में हैं। वहीं परिजन हत्या को सोची समझी साजिश करार दे रहे हैं। परिजनों का शक कई अपनों पर भी है। बताया जाता है कि दरवेश यादव का मनीष शर्मा से तीन महीने पहले विवाद हो चुका था। बुधवार को समझौते की बात करने के लिए मनीष एक अधिवक्ता के चैंबर में आया था। बताया जाता है कि मनीष अकेला ऐसा नहीं कर सकता। यह घटना सुनियोजित तरीके से की गई है।
मैंने गोली लगते ही दरवेश को संभाला
घटना के चश्मदीद सतीश यादव बताते हैं कि दरवेश और मनीष का लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था। मैं जब चेंबर में पहुंचा, तो दरवेश वहां पड़ी हुई थी। मैंने दरवेश को संभाला और अस्पताल लेकर गया।
मुझसे कहा, तू बहुत हमदर्द बनता है
घटना के दूसरे चश्मदीद और दरवेश के रिश्तेदार मनोज यादव का कहना है कि मनीष ने चैंबर में दाखिल होने के बाद पहले अभद्र व्यवहार किया। जब मैंने उसे टोका कि कैसे बोल रहे हो, तो मेरी तरफ पिस्टल दिखाते हुए बोला कि तू बहुत हमदर्द बनता है। मैं मेज के नीचे छिपा तब तक उसने दरवेश पर गोली चला दी। बाहर से भीड़ बढ़ती देख उसने खुद को गोली मार ली।
पत्नी भी दे चुकी है धमकी
दरवेश यादव के भतीजे पार्थ यादव ने बताया कि मनीष से विवाद के बाद उसकी पत्नी वंदना ने भी कई फोन करके धमकी दी थी। इसके चलते उसका नंबर ब्लैक लिस्ट में डाल दिया गया था। घटना सुनियोजित है। अकेला मनीष ऐसा नहीं कर सकता।
परिसर में कैसे पहुंची पिस्टल
अधिवक्ता लोड पिस्टल को लेकर दीवानी परिसर में दाखिल हुआ। ऐसे में सवाल है कि पिस्टल चेंबर तक कैसे पहुंची? इसे लेकर अंत्येष्टि के दौरान चर्चा रही। वहीं लोग भी घटना को सुनियोजित बताते नजर आए।