मथुरा। श्री रामलीला सभा के तत्वावधान में चल रहे रामलीला मंचन में रविवार को रावण ने मां सीता का हरण किया। खरदूषण वध की लीला देखने को दर्शकों की भीड़ रही। 15 अक्तूबर को शबरी मिलन, हनुमान मिलन, बाली वध आदि लीला चित्रकूट रंगमंच मसानी पर होंगी।
लंकापति रावण की बहिन सूपर्णखा राम के सौन्दर्य से प्रभावित होकर विवाह का प्रस्ताव रखती है तो लक्ष्मण उनके नाक-कान काट देते हैं। रोती हुई वह खरदूषण, त्रिसरा से अपनी व्यथा सुनाती है। खरदूषण वध की लीला के बाद सूपर्णखा क्रोधित होते हुए रावण को सारा वृत्तांत सुनाती हैं। रावण मारीच को सोने का मृग बनाकर पंचवटी भेजते हैं।
सीता उस मृग पर मुग्ध होकर प्रभु श्रीराम से मृगछाला लाने की कहती हैं। भ्राता लक्ष्मण को जानकी की सुरक्षा के लिए छोड़ राम मृग के पीछे निकल पड़ते हैं। जानकी मारीच द्वारा निकाली आवाज को श्रीराम की आवाज समझकर लक्ष्मण को पीछे से भेजती है। यहां लक्ष्मण रेखा खींचकर सीता से बाहर न आने की कहकर भगवान राम को ढूंढने निकल पड़ते हैं।
तभी रावण योगी के रूप में आकर छल से सीताजी का हरण कर ले जाता है । सीता की रक्षा के लिए जटायु प्रयास करता है लेकिन रावण उसके पंखों को काट देता है। राम व लक्ष्मण लौट कर आश्रम में सीता को न देख कर व्याकुल हो जाते हैं।
इस दौरान प्रसाद की सेवा गोपाल प्रसाद व सुरेन्द्र कुमार शर्मा ने की। लीला में गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी, रविकान्त गर्ग, सभापति जयन्ती प्रसाद अग्रवाल, उपसभापति जुगलकिशोर अग्रवाल, नन्दकिशोर अग्रवाल, प्रधानमन्त्री मूलचन्द गर्ग, उपप्रधानमन्त्री प्रदीप कुमार, कोषाध्यक्ष शैैलेश अग्रवाल, अजय सराफ, अंकुर गर्ग, गोविन्द शर्मा, गौरशरण सराफ, रामनारायन गर्ग, संजय बिजली, अनूप टैण्ट आदि मौजूद रहे।