मैनपुरी। करहल रोड पर बस दुर्घटना की जानकारी जैसे ही जिला अस्पताल में हुई अस्पताल का स्टाफ सतर्क हो गया। जानकारी तुरंत सीएमएस डॉ. आरके सागर को दी गई। सीएमएस ने अस्पताल में हाई अलर्ट जारी कर दिया। सभी डॉक्टरों, फार्मासिस्ट और कर्मचारियों को अस्पताल बुला लिया गया। इमरजेंसी के सभी बेड खाली करा लिए गए। यहां भर्ती मरीजों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। इसके अतिरिक्त वार्ड प्रभारी को भी सतर्क कर दिया गया। वार्ड में मरीज शिफ्ट करने के लिए भी पर्याप्त व्यवस्थाएं की गईं।
प्रत्येक वार्ड में तीन-तीन अतिरिक्त बेड शिफ्ट किए गए। इससे पहले कि घायल अस्पताल पहुंचे डॉक्टरों की टीम उपचार के लिए मौजूद हो गई। 6:05 बजे पांच घायलों को लेकर जसवंतपुर के प्रधान रिंकू यादव के लोग जिला अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टरों की टीम पहले से ही तैनात थी। डॉक्टरों ने उन्हें उपचार देना शुरू किया। पांच में से तीन को डॉक्टरों की टीम ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद एक-एक कर घायल आते गए। इनमें से 24 को अस्पताल में भर्ती किया गया। शेष छह को प्राथमिक उपचार दिया गया।
दुर्घटना की सूचना मिलते ही सीएमओ डॉ. एके पांडेय जिला अस्पताल पहुंच गए। यहां सीएमएस और सीएमओ ने जिलाधिकारी प्रदीप कुमार के निर्देशन में तुरंत पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टरों की टीम गठित कर दी। मृतकों की संख्या अधिक होने के कारण डॉ. अभिषेक दुबे, डॉ. मुनेंद्र यादव, डॉ. अशोक कुमार शाक्य और डॉ. पवन कुमार वर्मा को पोस्टमार्टम की जिम्मेदारी सौंपी गई। डॉक्टरों की टीम ने पहला पोस्टमार्टम 9:03 बजे किया। इसके बाद जैसे ही मृतकों की पहचान होती गई डॉक्टरों की टीम उनका पोस्टमार्टम करती गई। पोस्टमार्टम के लिए एसपी के निर्देश पर आरआई सहित अन्य पुलिस कर्मियों को पंचनामा आदि के लिए पोस्टमार्टम हाउस पर ही बुला लिया गया था। स्वयं एसपी अजय शंकर राय, जिलाधिकारी प्रदीप कुमार के साथ पोस्टमार्टम हाउस पर सारे समय डटे रहे।
दुर्घटना की जानकारी जैसे ही 108 एंबुलेंस सेवा को हुई तो तुरंत एंबुलेंस कार्यक्रम अधिकारी धीरज कुमार भी मौके पर पहुंच गए। यहां 108 के साथ 102 एंबुलेंस सेवा की भी मदद ली गई। धीरज कुमार ने बताया कि मरीजों तथा घायलों को जिला अस्पताल भेजने के लिए नौ एंबुलेंसों की सेवाएं ली गईं। पोस्टमार्टम के बाद जिला प्रशासन ने मृतकों के शवों को सरकारी वाहनों से ही उनके गांव पहुंचाया। शव खराब न हों इसके लिए शवों के लिए बर्फ भी लगवाई गई। शवों को सुरक्षित संबंधित जनपदों के लिए भेजा गया। अस्पताल में घायलों के उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही न हो इसके लिए सीएमएस डॉ. आरके सागर ने वरिष्ठ चिकित्सक डा.आर के सिंह को जिम्मेदारी सौंपी। गंभीर रूप से घायल तीन लोगों को तुरंत 108 एंबुलेंस सेवा से सैफई रेफर कराया।
जिला अस्पताल में सुबह आठ बजे ओपीडी शुरू होती इससे पहले यहां भीड़ थी। कोई कुछ समझ नहीं पा रहा था। यहां पहुंचे मरीजों ने जब यह हालात देखे तो वे भी सिहर उठे और अपने घरों को लौट गए। सुबह 8:30 बजे तक जिला अस्पताल छावनी बन चुका था। एक तरफ जहां पुरुष कांस्टेबल घायलों के साथ ही मृतकों के परिजनों की देखभाल कर रहे थे, वहीं महिला पुलिसकर्मियों ने मृतकों के परिवार की महिलाओं की देखरेख की।