जलेसर। वाणिज्यकर की एसआईवी ने सियाराम ट्रांसपोर्ट कंपनी पर छापामार कार्रवाई की। ट्रांसपोर्ट स्वामी के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने और सबूत मिटाने का मामला भी दर्ज कराया है।
शनिवार दोपहर करीब डेढ़ बजे वाणिज्यकर की एसआईवी सीधे सियाराम ट्रांसपोर्ट कंपनी पर पहुंची। मगर ट्रांसपोर्ट स्वामी ने दरवाजा नहीं खोला। करीब डेढ़ घंटे के बाद जब मौके पर एसडीएम जलेसर विजय कुमार कोतवाली पुलिस फोर्स के साथ पहुंचे, जिन्होंने ट्रांसपोर्ट का दरवाजा खुलवाया। इसके बाद वाणिज्यकर और एसआईवी टीम में शामिल अधिकारी अपनी कार्रवाई शुरू कर पाए।
छापामार कार्रवाई टीम में शामिल डिप्टी कमिश्नर जीएसटी डॉ. देवेंद्र सिंह ने बताया कि बनारस में जलेसर की याशिका एंटरप्राइजेज कंपनी का माल पकड़ा गया है। इसमें सियाराम ट्रांसपोर्ट कंपनी के कागज पाए गए हैं, जबकि इस नाम की कोई कंपनी पंजीकृत नहीं है। टीम ने करीब चार घंटे तक ट्रांसपोर्टर के घर जांच पड़ताल की।
कार्रवाई के दौरान उपजिलाधिकारी विजय कुमार, डिप्टी कमिश्नर अलीगढ़ कमला प्रसाद, वीर सिंह, संतोष कुमार, बीआर सिंह, संतोष कुमार, डिप्टी कमिश्नर कासगंज वरुण तिवारी, डिप्टी कमिश्नर एटा डॉ. देवेंद्र सिंह, वाणिज्य कर अधिकारी राजेंद्र सिंह, श्यामवीर सिंह, भावेंद्र भास्कर, हरिओम शर्मा, कोतवाली प्रभारी सुरजन सिंह के साथ भारी मात्रा में पुलिस फोर्स तैनात रहा।
ट्रांसपोर्टर ने जला दिया कंप्यूटर और कागज :
जब ट्रांसपोर्टर को जानकारी हुई कि एसआईवी टीम का छापा पड़ा है तो उसने दरवाजे को अंदर से बंद कर लिया। जब तक प्रशासनिक अधिकारी दरवाजा खुलवा पाते। ट्रांसपोर्टर ने कंप्यूटर और जरूरी दस्तावेजों को जला दिया।
एसआईवी की सुन धड़ाधड़ गिरे शटर
कस्बे में जैसे ही व्यापारियों को जानकारी हुई कि एसआईवी का छापा है, वैसे ही हड़कंप मच गया। धड़ाधड़ घंटा घुंघरू व्यापारियों के शटर गिरना शुरू हो गए। बताया जा रहा है कि सियाराम के अलावा टीम दो अन्य ट्रांसपोर्टर के यहां पहुंची थी। मगर उनके न मिलने पर वहां से लौट आई।
बनारस में पकड़ी गई गाड़ी पर सियाराम ट्रांसपोर्ट कंपनी के कागज पाए गए थे, जबकि इस नाम की कोई फर्म पंजीकृत नहीं है। जांच में ट्रांसपोर्टर द्वारा तमाम तरह की बाधा उत्पन्न की गई। कागज और कंप्यूटर भी जला दिया गया है। इसको लेकर सरकारी कार्य में बाधा डालने और सबूत मिटाने को लेकर डीसी बीआर सिंह ने ट्रांसपोर्टर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
डॉ. देवेंद्र सिंह, डिप्टी कमिश्नर जीएसटी