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रैप तकनीक से सुधारेगी मथुरा की सड़कों की सेहत

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डैमो - फोटो : डैमो
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मथुरा। जिले में जलभराव और रेतीले इलाके में बार-बार टूटने वाली सड़कों को अब रैप तकनीक से दुरुस्त किया जाएगा। इस तकनीक से छह टूटी सड़कों की मरम्मत कराए जाने का फैसला किया गया है।
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अब तक सड़क निर्माण में पुरानी परंपरागत तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसमें 140 एमएम, 90 एमएम और 40 एमएम की गिट्टी का उपयोग किया जाता है। इन्हें कूटते हुए डामरीकरण व जीरा गिट्टी की परत बनाकर सड़क तैयार की जाती है। इस तकनीक से बनी सड़क जलभराव व रेतीले इलाके में भारी वाहन चलने से जल्द खराब हो जाती है। समय से पहले टूट जाती है। इस स्थिति से निपटने के लिए अब लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों ने नई तकनीक का उपयोग लाने का फैसला किया है।

इसमें रेतीले और जलभराव से संबंधित इलाकों में री एलेक्स्माइंड एसफार्ड पेमेंट (रैप) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसमें टूटी हुई सड़कों का पहले नीचे का ढांचा सही किया जाएगा, उसके बाद डामरीकरण होगा। यह संपूर्ण कार्य मशीन द्वारा किया जाएगा। पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता सूरज कुमार ने बताया कि मशीन से बार-बार टूटने वाली सड़क के अंदर के ढांचे को मशीन में लगे कटर व पाइप के जरिए तारकोल, लाइम (चूना) मिलाकर स्थिरीकरण किया जाएगा। इसमेें अंदर के ढांचे की गिट्टियां आपस में सैट होकर चिपक जाएंगी और ढांचा मजबूत होगा। इसके बाद डामरीकरण किया जाएगा। मथुरा में यमुना किनारे वृंदावन डांगौली मार्ग, जलभराव वाले इलाकों में सड़कों पर इस तकनीक का प्रयोग होगा।
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