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प्रशिक्षक हैं नहीं कैसे निखरें खेल प्रतिभाएं

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खेल - फोटो : अमर उजाला
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मैनपुरी। सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए तमाम प्रयास कर रही है। खेलों के लिए बजट भी मंजूर किए जा रहे हैं। पर, जिलों में व्यवस्थाओं के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही दिखती है। इसकी बानगी राजकीय स्टेडियम में दिखती हैं, जहां मौजूदा समय में सिर्फ दो प्रशिक्षक हैं।
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ऐसे में साफ है कि जब प्रशिक्षक ही नहीं हैं, तो खेल प्रतिभाएं आखिर निखरकर आगे कैसे बढ़ेंगी। बता दें कि राजकीय स्टेडियम पर मेहरबान हुए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सुविधाओं की सौगात तो दी। पर, प्रशिक्षक की व्यवस्था आज तक नहीं हो सकी है। स्टेडियम में केवल क्रिकेट और वालीबाल के ही प्रशिक्षक हैं।

उनकी भी अंशकालिक ही तैनाती है। जबकि एथलेटिक्स, बैडमिंटन, तैराकी, फुटबाल, भारोत्तोलन, कुश्ती के यहां प्रशिक्षक नहीं हैं। जिला क्रीड़ा अधिकारी पीके गुप्ता का कहना है तमाम प्रयासों के बाद भी आज तक प्रशिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। इसके अभाव में युवा अपनी प्रतिभा को निखार नहीं पा रहे हैं। कई बार इस संबंध में पत्राचार भी किया जा चुका है।
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बदहाली के शिकार हैं पायका मैदान
मैनपुरी। ग्रामीण क्षेत्र में खेलों को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए पायका मैदान भी अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं। योजनाएं बनती और बदलती रहीं। पर, इनके रख रखाव की कोई चिंता किसी ने नहीं की। जिले में बने 118 पायका मैदानों में 115 ग्राम स्तरीय्र औ तीन ब्लाक स्तरीय थे। ग्राम सभाओं के बाद अब उनके विकास का जिम्मा मनरेगा को दिया गया है। हर बार बजट का अभाव आड़े आता रहा है।

बता दें कि पायका योजना समाप्त कर दी गई है। उस समय बनाए गए क्रीड़ा श्री के पद भी समाप्त कर दिए गए है। इसके बाद शुरू की गई राजीव गांधी खेल अभियान योजना भी बदहाली का शिकार हो गई। योजना लागू होने के बाद विभाग को बजट ही नहीं मिला। नतीजा यह हुआ कि पायका के मैदान बदहाल होते चले गए। अब तो पता ही नहीं चलता कि पायका मैदान आखिर कहां हैं। क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी बलवीर सिंह यादव बताते हैं कि विभाग के पास खेलकूद कार्यक्रम, पीआरडी, युवक मंगल दल, युवक मंगल महिला दल, पायका, राजीव गांधी खेल अभियान योजना, जन जागरुकता कार्यक्रम, सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसी योजनाएं हैं। बजट न मिलने के कारण सब बदहाल है।
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