एटा। परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत नसबंदी कराने वाली महिला ने जब बच्चे को जन्म दिया तो उसके भरण पोषण व नसबंदी फेल होने का वाद उपभोक्ता फोरम में पीड़िता द्वारा डाला गया। मामला वर्ष 2012 का था, जिसमें न्याय पाने में पीड़िता को छह वर्ष लग गए। उपभोक्ता फोरम ने स्वास्थ्य विभाग पर जुर्माना ठोंकते हुए मय ब्याज के भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
तहसील सदर के गांव नंदगांव निवासी महिला गीता देवी पत्नी योगेंद्र कुमार ने परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत नसबंदी को चुनते हुए दो जनवरी 2012 को ऑपरेशन कराया था। नसबंदी ऑपरेशन होने के बाद भी महिला के पेट में गर्भ ठहर गया। इसका सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराया तो पेट में बच्चा पलने की पुष्टि हो गई। बाद में महिला ने बेटी को जन्म दिया।
बेटी को जन्म देने के बाद पीड़िता ने चार दिसंबर 2013 को उपभोक्ता फोरम न्यायालय में स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ वाद दायर कर दिया। वाद की सुनवाई करते हुए सरकार की नियमावली के अनुसार 30 हजार रुपये नसबंदी फेल होने की धनराशि, 1500 रुपये वाद खर्चा तथा चार लाख रुपये बच्ची के भरण पोषण के देने का आदेश दिया गया है। पीड़िता को यह लड़ाई लंबी जरूर लडनी पड़ी मगर न्याय पाकर खुश है।