हमारे समाज को पुरुष प्रधान माना जाता है, लेकिन परिवार नियोजन के मामले में महिलाओं पर सारा दारोमदार है। जिले में आधी आबादी पर ही आबादी नियंत्रण का जिम्मा है। जनसंख्या नियंत्रण को चल रहे कार्यक्रमों की हकीकत पर गौर करें तो जिले में नसबंदी और परिवार नियोजन योजनाएं पूरी तरह से फ्लॉप साबित हो रही हैं। जिले में नसंबदी कराने में पुरुष फिसड्डी हैं। जबकि बीते छह माह में महज छह महिलाओं और एक पुरुष ने नसबंदी कराई है। वहीं जिले में जून महीने में 2365 बच्चे पैदा हुए हैं। ऐसे में जनसंख्या नियंत्रण महज दिखावा बनकर रह गया है।
नसबंदी, कॉपर-टी समेत तमाम गर्भनिरोधक उपाय के बारे में दपंतियों को जानकारी दी जाती है। नसबंदी के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में स्वास्थ्य विभाग को 2500 महिला-पुरुषों की नसबंदी करनी है, लेकिन जिले में छह महीने में 60 महिलाओं और एक पुरुष की नसबंदी की है। वहीं कॉपर-टी के लिए मिले 22759 के लक्ष्य के सापेक्ष 1849 कॉपर-टी की पूर्ति हो सकी है। इससे साफ जाहिर है कि परिवार नियोजन को लेकर जिले में जागरूकता कहां तक कारगर साबित हो रही है। वहीं जन्म पंजीकरण की बात करें तो जिले में जून महीने में 2365 बच्चों के पंजीकरण हुए हैं। जबकि 63 बच्चों की मौत होना बताया गया है। सीएमओ डा. आरसी पांडेय कहते हैं कि जनसंख्या और परिवार कल्याण कार्यक्रमों को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। सीएचसी-पीएचसी में जागरूकता कार्यक्रम करने के निर्देश दिए हैं।
संकुचित धारणा से पुरुष पीछे
काउंसलर अंजू सक्सेना कहती हैं कि नसबंदी को लेकर पुरुषों में नकारात्मकता रहती है। महिलाओं की नसबंदी कराकर वे सोचते हैं कि अब परिवार नियोजन हो सकेगा, लेकिन ऐसा नहीं है। दंपति को मिलकर इस पर विचार करने की जरूरत है।
आंकड़ों में खेल
स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों के जन्म-मृत्यु पंजीकरण आंकड़ों में खेल किया है। विभाग ने जून महीने में मरने वाले संभावित बच्चों की संख्या 1092 लिखी है। जबकि महज 63 बच्चों की मौत हुई है।
कहते हैं आंकड़े
1645878 है जिले की कुल जनसंख्या
326726 दंपतियों का मिला लक्ष्य
60 महिलाओं ने कराई है नसबंदी
2365 बच्चे पैदा हुए जून महीने में