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बेरोजगारी और समायोजन होगा मुख्य मुद्दा

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बेरोजगारी और समायोजन होगा मुख्य मुद्दा - फोटो : अमर उजाला
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एटा। न मान-सम्मान और न ही समायोजन। अपने हक के लिए जंग लड़ रहे शिक्षामित्र भी लोकसभा चुनाव को लेकर एकजुट हो रहे हैं। गुरुवार को ‘अमर उजाला’ के संवाद कार्यक्रम में शिक्षामित्रों ने अपने मुद्दों पर खुलकर रायशुमारी की। शिक्षामित्रों ने कहा कि सरकार ने केवल शिक्षामित्रों के साथ खिलवाड़ किया है। हर बार मान-सम्मान दिलाने का वादा करके बस शिक्षामित्रों को झूठा दिलासा दिया गया लेकिन इस बार चुनाव में शिक्षामित्र निर्णायक भूमिका निभाएंगे। जो शिक्षामित्रों की मांगों पर गौर करेगा, उसे ही वे दिल्ली की कुर्सी पर काबिज कराएंगे।
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कहते हैं शिक्षामित्र
सरकारों ने शिक्षामित्रों का बस प्रयोग किया है। सुविधा दिलाने के नाम पर बस राजनीति की गई है। अबकी ऐसा नहीं होने देंगे।
सुग्रीव सिंह

प्रदेश में समायोजन रद्द होने के बाद 1200 शिक्षामित्रों ने जान दी। सरकारें बस झूठे दिलासे देती रहीं, लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया।
उदय प्रताप सिंह

शिक्षामित्रों को अयोग्य कहा जाता है। जबकि शिक्षामित्रों ने शिक्षा व्यवस्था में कई सकारात्मक परिवर्तन किए हैं।
सुनील चौहान

हमारी मांगों को सरकारों ने बस घोषणा पत्र का बिंदु बनाया है, लेकिन इस बार शिक्षामित्र सोच समझकर सांसद और सरकार चुनेंगे।
ओमेंद्र कुशवाह

सरकार के तमाम नेता समायोजन रद्द होने के बाद साथ बैठकर रोए थे, लेकिन आज वो शिक्षामित्रों के मुद्दे पर चुप हो जाते हैं। इनको सबक सिखाएंगे।
भूपेंद्र यादव

हमको एक राजनीतिक दल का एजेंट कहा जाता है, लेकिन शिक्षामित्र केवल अपना हक मांग रहे हैं। जो हक देगा, उसे चुनेंगे।
विजय तिवारी

कोर्ट ने हमें दो मौके देने के लिए कहा था, लेकिन अतिरिक्त परीक्षा की बात नहीं कही थी। सरकारों ने शिक्षामित्रों के साथ छल किया है। इसका शिक्षामित्र करारा जवाब देंगे।
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हरिओम प्रजापति

जिले में शिक्षामित्रों के ढाई हजार परिवार हैं। इस बार शिक्षामित्र अपने मुद्दे समायोजन और बेरोजगारी दूर करने वाली सरकार चुनेंगे।
राजेश गुप्ता

सरकारें हर काम में शिक्षामित्रों का प्रयोग करती हैं, लेकिन फिर भी हम अयोग्य हैं। इसका जवाब अब शिक्षामित्र ही सरकारों को देंगे।
विष्णु चौहान

समायोजन रद्द होने से परेशानी हुई है। चुनाव के दौरान ही नेताओं को शिक्षामित्र याद आते हैं। इस बार सोच समझकर मतदान करूंगी।
शोभना शाक्य

शिक्षामित्रों का घोषणा पत्र
1. समायोजन को बहाल कर पुन: नियुक्ति दी जाए।
2. 10 हजार मानदेय को बढ़ाया जाए।
3. शिक्षामित्रों को अतिरिक्त परीक्षा से बाहर किया जाए।
4. बेरोजगारी दूर करने के उपाय किए जाएं।
5. शिक्षामित्रों को लेकर झूठे आश्वासन नहीं दिए जाएं।
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