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चुनौतियों के बीच चमक बिखेर रहे सुहाग नगरी के कांच उत्पाद

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फिरोजाबाद। चुनौतियों के बीच भी सुहागनगरी में बनने वाले कांच उत्पाद विदेशों तक अपनी चमक बिखेर रहे हैं। विदेशों में एक्सपोर्ट होने वाले कांच आइटमों को तैयार करने में उद्यमियों के सामने तमाम चुनौतियां खड़ी हैं, उसके बावजूद साल दर साल एक्सपोर्ट का ग्राफ निरंतर बढ़ता जा रहा है।
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सुहागनगरी के नाम से देश-विदेश में विख्यात फिरोजाबाद की अपनी एक अलग पहचान है। वर्ष 1996 के बाद नेचुरल गैस से कांच आइटमों का उत्पादन होता है। यहां बनने वाले किचन बेयर, ग्लास आइटम, घर सजावट के लिए आकर्षक डिजाइन के झाडू फानूस आयटमों का विदेशों तक एक्सपोर्ट किया जाता है। निर्यातकों के सामने कभी गैस की रेट बढने तो कभी ड्रा बैक व भाड़ा कम मिलने की तमाम चुनौतियां हैं। निर्यातक इन चुनौतियों से लड़ते हुए अपने कांच आइटमों की चमक को लगातार बढ़ाते जा रहे हैं। फिरोजाबाद में निर्यात का ग्राफ दर-दर साल बढ़ता रहा है। इसके साथ निर्यातक इकाइयों की संख्या में भी लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है।

उद्योग विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2014 में फिरोजाबाद से करीब 700 करोड़ का एक्सपोर्ट होता था। उस समय निर्यातक इकाइयां की संख्या 45 थी। वर्तमान में वर्ष 2018 में एक्सपोर्ट का ग्राफ बढ़कर 1200 करोड़ तक पहुंच गया है। वहीं निर्यातक इकाइयों की संख्या भी बढ़कर 70 तक पहुंची है। वहीं इनडायरेक्ट एक्सपोर्ट का ग्राफ 2000 करोड़ से ऊपर होता है।
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सुहागनगरी में बनने वाले कांच उत्पादों की विशेष डिमांड है। फिरोजाबाद से नेपाल, भूटान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, श्रीलंका व बंगलादेश में भी कांच आइटमों का बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट होता है। प्रमुख निर्यातकों की मानें तो सार्क देशों में ही 200 करोड़ से अधिक का एक्सपोर्ट होता है।

कांच आइटम तैयार करने के लिए निर्यातकों को कच्चा माल, केमिकल व अन्य सामान की जरूरत होती है। यह सारा टे्रडर्स कंपनियों द्वारा एक्सपोर्ट किया जाता है। इन्हीं कंपनियों से निर्यातक कच्चा व केमिकल की खरीद करते हैं। वर्तमान में इस पर 2.50 प्रतिशत ड्रा बैक मिलता है। जबकि निर्यातक लंबे समय से कम से कम सात प्रतिशत ड्रा बैक देने की मांग उठा रहे हैं।

फिरोजाबाद में तैयार कांच आइटमों का बड़ी मात्रा में एक्सपोर्ट होता है। निर्यातकों द्वारा तैयार माल वाहनों के जरिए मुंबई पोर्ट तक भेजा जाता है, जिसका निर्यायकों को भाड़ा स्वयं वहन करना होता है। निर्यातकों का कहना है कि मुंबई तक माल भेजने में 80 हजार से एक लाख तक भाड़ा लगता है। इसमें राज्य सरकार को रियात देनी चाहिए।


कांच उत्पादों का एक्सपोर्ट करने में आने वाली अड़चनों को केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा गंभीरता से दूर करना चाहिए, जिससे कांच उत्पादों के एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिल सके। इसके लिए लगातार केंद्र और प्रदेश सरकार के माध्यम से प्रयास कर रहे हैं।
मुकेश बंसल टोनी-निर्यातक

कांच आइटमों पर मिलने पर ड्रा बैक को बढ़ाने पर सरकार को सोचना चाहिए। मुंबई तक माल भेजने के लिए भाड़ा भी अधिक देना पड़ता है, भाड़े के रूप में मिलने वाली सहायता भी कम मिल रही है। इसके चलते कई समस्याएं सामने आ रही हैं।
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प्रमोद गर्ग-निर्यातक
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