फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिला कारागार में होगा जैविक सब्जियों का उत्पादन

विज्ञापन
जिला कारागार में होगा जैविक सब्जियों का उत्पादन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
एटा। अब जिला कारागार में जैविक सब्जियों का उत्पादन होगा। कारागार में पैदा होने वाली सब्जियों में यूरिया, डीएपी और फास्फेट का प्रयोग पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। कारागार में रहने वाले 900 से ज्यादा बंदियों के स्वस्थ्य रहने के साथ-साथ उन्हें स्वादिष्ट और पौष्टिक सब्जी मुहैया हो सके। इसके लिए यह नई पहल शुरू की गई है।
विज्ञापन

दरअसल, जिला कारागार में तीन एकड़ भूमि पर खेती की जाती है, जिसमें बंदियों के लिए आलू, बंदगोभी, टमाटर, मिर्च आदि सब्जियों की भी पैदावारी की जाती है। कारागार में उत्पादन की जाने वाली सब्जी पूरी तरह से पौष्टिक होने के साथ-साथ स्वादिष्ट रहे। इसके लिए कारागार में यूरिया, डीएपी और फास्फेट आदि के इस्तेमाल को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके लिए कारागार प्रशासन ने भी अनुमति प्रदान कर दी है। बताते चले कि कारागार में जैविक सब्जी उत्पादन के लिए कारागार सुधार के क्षेत्र में काम कर रही सामाजिक संस्था रायुश प्रमुख प्रदीप रघुनंदन पिछले लंबे समय से प्रयासरत थे। जिसके तहत उन्होंने खेती योग्य जमीन को गोद लेते हुए जैविक उत्पादन किए जाने का अनुबंध जिला कारागार प्रशासन के साथ किया है।
आंकड़ों पर नजर
985 जिला कारागार में हैं बंदी
03 एकड़ क्षेत्रफल में है कृषि योग्य भूमि
22 जिला कारागार में है कुल बैरक
14.75 एकड़ है जिला कारागार का कुल क्षेत्रफल
वर्जन
जैविक सब्जी उत्पादन के लिए बायोफिट, स्टिमरिच, एसएचईटी इंटाक्ट आदि जैविक घोलों का इस्तेमाल किया जायेगा, जिससे मिट्टी को रासायनिक तत्वों से बचाकर सब्जियों की उत्पादकता बढ़ाई जा सके। सब्जियों का उत्पादन जैविक तरीके से किया जाएगा। जिससे सब्जियों में अधिक स्वाद व पौष्टिकता भी बनी रहे।
विज्ञापन

प्रदीप रघुनंदन, सामाजिक कार्यकर्ता
जिला कारागार में यह एक नई पहल शुरू होने जा रही है। एटा जिला कारागार प्रदेश का पहला कारागार बन गया है, जिसमें जैविक तरीके से सब्जियों का उत्पादन होगा। रासायनिक तत्वों से बंदियों को निजात मिलेगी।
पीपी सिंह, कारागार अधीक्षक

बंदियों को मिले स्वस्थ्य और सामान्य जीवन
जिला कारागार में शुरू होने वाली नई पहल के पीछे सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप रघुनंदन की सक्रियता है। प्रदीप कहते हैं कि हमारा उद्देश्य कारागार में निरुद्ध बंदियों को स्वस्थ्य और सामान्य जीवन प्रदान करना है। जहां वे अपने समय का सदुउपयोग कर अपने अंदर उच्च जीवन मूल्यों की स्थापना कर सके। रासायनिक इस्तेमाल से हो रही गंभीर बीमारियों से बच सके। इसलिए अन्य जेलों में भी यह योजना लागू कराए जाने का काम किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें