आगरा। शीतगृहों में भरे हुए आलू को अब गोशालाओं में भेजा जा रहा है। राजस्थान, मध्यप्रदेश के अलाव आसपास की बड़ी गोशालाओं में संपर्क कर इनको भेजा जा रहा है। अब तक करीब चार लाख आलू पैकेट गोशालाओं को दान किए जा चुके हैं।
शीतगृह में अभी भी लगभग 55 लाख आलू पैकेट जमा हैं। कीमत न मिलने पर किसान इन्हें लेने नहीं आ रहे। सड़े हुए आलू को फेंका जा रहा है। बचे हुए अच्छे आलू को शीतगृह स्वामी निशुल्क दान में दे रहे हैं। इसमें आश्रम, गौशाला और अन्य जरूरतमंद लोग हैं।
सबसे ज्यादा आलू गोशाला भेजा जा रहा है। धोलपुर के लिए ढाई लाख आलू पैकेट भिजवाए हैं। आगरा कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के अध्यक्ष सुदर्शन सिंघल ने बताया कि आलू सड़ने से बेहतर है कि किसी के उपयोग में आए। ऐसे में आसपास के जिलों में गोशालाओं में आलू भेजा जा रहा है। एसोसिएशन के सदस्यों से वारदाना खाली कर आलू निशुल्क देने के लिए कहा गया है।
आवारा जानवरों का चारा बना शीतगृह के सामने पड़ा आलू
बाह। मंदी की मार के चलते किसानों द्वारा शीतगृह में छोडे़ गए आलू को सड़क से लेकर बीहड़ तक फेंका जा रहा है। बाह, जैतपुर, पिनाहट क्षेत्र के शीतगृहों के सामने खुले में फेंके गया आलू आवारा जानवरों का चारा बन गया है।
लोगों का कहना है कि आवारा जानवरों के लिए यह आलू मौत का कारण बन सकता है। जिम्मेदार अधिकारी न तो किसानों के आंसू पोंछने पहुंचे और न ही शीतगृह स्वामियों का दर्द साझा करने को गए। खराब आलू खाने से आवारा पशुओं में बीमारी फैली तो कौन जिम्मेदार होगा।