अपने बहुमूल्य कीमती जेवर और अन्य चीजों को लोग बैंक के लॉकर में सुरक्षित मानते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। बैंक लॉकर की सुरक्षा अधिक रहती है यह बात सही है, लेकिन यदि कोई लॉकर से चोरी कर लेता है या किसी दुर्घटना में लॉकर में रखा सामान नष्ट हो जाता है तो बैंक की कोई गारंटी नहीं है।
कानपुर की बैंक में लॉकर तोड़कर चोरी होने की वारदात के बाद बैंक ग्राहक डर गए हैं। कारोबारी शशिकांत का कहना है कि लोग बैंक पर भरोसा करके लॉकर में कीमती जेवर और अन्य सामान भी रखते हैं। कासगंज पंजाब नेशनल बैंक के प्रबंधक विजय कुमार का कहना है कि बैंक के लॉकर में रखे सामान की जिम्मेदारी बैंक की नहीं है। इसके लिए उपभोक्ता स्वयं जिम्मेदार है क्योंकि उपभोक्ता बैंक के लिए लॉकर का स्वयं इस्तेमाल करता है। एक्सिस बैंक के शाखा प्रबंधक शगुन अग्रवाल का कहना है कि लॉकर की सुरक्षा बैंक की जिम्मेदारी है। फिर भी कोई लॉकर से सामान गायब होता है, चोरी होता है या कोई दुर्घटना घटती है तो बैंक की कोई जिम्मेदारी नहीं है। एटा में गुरुवार को अमर उजाला टीम ने स्थानीय बैंक शाखाओं में पहुंचकर लॉकरों की स्थिति की पड़ताल की। प्रबंधकों का कहना है कि नियमों के अनुसार बैंक का काम केवल शुल्क लेकर लॉकर उपलब्ध कराना है। बैंक इसकी सुरक्षा करती है, लेकिन अगर किसी घटना के दौरान लॉकर में रखे सामान का नुकसान होता है, तो बैंक उसके लिए जिम्मेदार नहीं है।
- हमारे यहां लॉकर की फीस 1200 रुपये है। मगर लॉकर के अंदर रखे जेवर गायब होने या फिर चोरी होने पर हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है। घटना होने पर पर हम रिपोर्ट दर्ज कराते हैं, लॉकर धारको को चोरी की रिपोर्ट की कॉपी मुहैया करा देते हैं। इंश्योरेंस भी हमारी ओर से नहीं कराया जाता है। अगर उपभोक्ता चाहता है तो वह अपना किसी भी कंपनी से इंश्योरेंस करा सकता है।
एके आनंद, शाखा प्रबंधक, पीएनबी एटा
हमने अपनी पूरी शाखा का इंश्योरेंस कराया है। अगर कोई घटना होती है तो उस दौरान ही बैंक के उच्चाधिकारी निर्धारित करेंगे कि लॉकर धारकों को क्या देना है। किसी एक लॉकर को लेकर हमारे यहां कोई इंश्योरेंस नहीं होता है।
- अनिल मेहरा, शाखा प्रबंधक, एसबीआई