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नहरों और रजबहों नहीं है पानी, फसल की सिंचाई में आई परेशानी

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मैनपुरी। नहरों और रजबहों में पानी न आने से गेहूं की फसल सूखने लगी है। किसान निजी संसाधनों से फसलों की सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन इससे उनकी जेब पर अधिक बोझ पड़ रहा है। अगर समय पर फसल की सिंचाई न की गई तो उत्पादन घटना तय है। जिले में बड़े पैमान पर गेहूं की बुवाई की जाती है। लगभग 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में किसान गेहूं की बुवाई करते हैं।
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15 नवंबर से गेहूं की बुवाई शुरू हो जाती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं की फसल में बुवाई के 21 दिन के बाद सिंचाई करनी होती है। अब गेहूं की फसल एक माह से भी अधिक की हो चुकी है, लेकिन नहरों में पानी न होने से किसान फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। इससे फसलें सूख रही हैं। अगर समय से फसलों की सिंचाई न की गई तो गेहूं का उत्पादन गिर जाएगा।

वहीं, दूसरी ओर नहरों व रजबहा की सफाई का काम चल रहा है। किसान इस बात का भी विरोध कर रहे हैं कि आखिर समय से नहरों व रजबहा की सफाई क्यों नहीं कराई गई। मजबूरन किसानों को निजी संसाधनों से फसलों की सिंचाई करनी पड़ रही है इससे किसानों में रोष हैं। बताते चलें कि जिले में कानपुर ब्रांच नहर व इटावा ब्रांच नहर से ही फसलों की सिंचाई होती है। इनमें से निकलने वाली 87 छोटी नहरों व रजबहों के माध्यम से पानी खेतों तक पहुंचता है, जिससे 52 हजार हेक्टेयर फसल की सिंचाई की जाती है।
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जानकारी के अनुसार कानपुर ब्रांच नहर में बुधवार को पानी छोड़ा गया है जबकि इटावा ब्रांच नहर में तो पानी तक नहीं छोड़ा गया है। ऐसे में किसानों को सप्ताह बाद ही सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा। रोस्टर के अनुसार भी 27 दिसंबर तक किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा।

निजी संसाधनों से बढ़ जाएगी लागत
किसानों के लिए निजी संसाधनों से गेहूं की फसल की सिंचाई करना असान नहीं है। एक ओर जहां संसाधनों की कमी आड़े आती है तो वहीं दूसरी ओर खर्च भी बढ़ जाता है। एक बीघ गेहूं की फसल की सिंचाई करने में लगभग चार सौ रुपये का खर्च आता है। ऐसे में किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।

नहरों व रजबहा की सफाई का काम अंतिम चरण में हैं। कानपुर ब्रांच नहर से सिंचित क्षेत्र में शुक्रवार से पानी मिलना शुरू हो जाएगा। इटावा ब्रांच नहर में अभी एक सप्ताह का समय और लगेगा।
गोपाल जी, अधिशासी अभियंता, मैनपुरी प्रखंड, निचली गंगा नहर।

किसानों की बात
जब हर बार गेहूं की फसल से पहले ही नहरों की सफाई होती है तो इसमें लापरवाही क्यों की जाती है। समय रहते अगर सफाई हो जाए तो किसानों को परेशानी न हो।
धनीराम

किसानों के हित को ध्यान में रखकर सरकारी विभागों द्वारा कार्य नहीं किया जाता है। दो माह से नहरों में पानी नहीं है, ऐसे में अब तो नहरों में पानी छोड़ा जाना चाहिए।
रमेश चंद्र

निजी संसाधनों से किसान गेहूं की फसल की सिंचाई कर रहे हैं। इससे उन्हें परेशानी तो हो रही है साथ ही खर्च भी अधिक पड़ रहा है। इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा।
रामनरेश सिंह

किसानों के लिए न सरकार सोचती है और न ही प्रशासन। जब दिसंबर में गेहूं की सिंचाई शुरू हो जाती है तो फिर अब तक नहरों और रजबहों में पानी क्यों नहीं छोड़ा गया।
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आसाराम
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