एटा। आजादी के 72वें साल के जश्न में इस बार जिले के 41 गांवों को कुपोषण से आजादी मिलेगी। केंद्र और प्रदेश सरकार के निर्देश पर चल रहे कुपोषण मुक्ति अभियान के तहत जिले के गांवों में कुपोषण का पूरी तरह से खात्मा हो चुका है। अभियान के तहत चयनित किए गए 100 राजस्व गांवों में से 41 गांव 15 अगस्त तक पूरी तरह से कुपोषण मुक्त हो जाएंगे।
जिले में बाल विकास विभाग द्वारा खुले में शौच मुक्त अभियान की तर्ज पर कुपोषण मुक्ति अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत गांवों में कई बिंदुओं पर सर्वे चल रहा है। मगर अनिवार्य दो बिंदुओं के आधार पर 41 गांव ऐसे सामने आए हैं, जोकि कुपोषण मुक्त होने की राह पर हैं।दावा किया है कि इन गांवों में कोई भी बालक अतिकुपोषित नहीं है। इन गांवों के प्रथम सत्यापन के लिए अधिकारियों को नामित कर दिया गया है। 15 अगस्त से पहले अधिकारी कुपोषण मुक्त को लेकर रिपोर्ट देंगे। इसके बाद इन गांवों को कुपोषण मुक्त घोषित किया जाएगा।
गांव के बाहर लगेगा बोर्ड
कुपोषण मुक्त होने के बाद गांव के बाहर बोर्ड लगाया जाएगा। जिसमें कुपोषण मुक्त गांव होने का जिक्र किया जाएगा। इस अभियान में सहभागिता करने वाले कर्मचारियों को भी सम्मानित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
ये गांव होंगे कुपोषण मुक्त
जावड़ा, चोंचा वनगांव, नगरिया, शिवसिंहपुर, बमनई, शहनौआ, चुरथकरा, खबा, उदयपुरा, हिरौदी, दलेलपुर, कैला, लुहारीखेड़ा, महानमई, सुपैती, जिन्हैरा, गोबरा, भरतोली, सरोंठ पछाया, सरोंठ पवांया, सकतपुर, मिर्जापुर सई, चपरई सिकंदरपुर, भदुईया मठ, अजुनई सिमरई, इमैदपुरा, भुरगवां, सिराम, सैलार, लालपुर जहांगीराबाद, सकुटी खेड़ा।
कुपोषण मुक्त अभियान के तहत 41 गांवों चयनित किए जा चुके हैं। इन गांवों में अधिकारियों का सत्यापन करना है। 15 अगस्त तक गांव कुपोषण मुुक्त हो जाएंगे।
सत्यप्रकाश, डीपीओ।