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उम्मीदें चढ़ती रहीं परवान, सांसद बने रहे अनजान

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उम्मीदें चढ़ती रहीं परवान, सांसद बने रहे अनजान - फोटो : अमर उजाला
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एटा। वादे बहुत थे, दिलासे बहुत दिए गए और उम्मीदों का पूरा न करने का दस्तूर भी खूब निभाया गया। जिले को सांसद ने योजनाओं खूब दीं, लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं हो सका। रेल विस्तार से लेकर फोरलेन निर्माण को बजट भले मिल गया, लेकिन काम दिखता नजर नहीं आया। फाइलों में बंद कागजों में ही योजनाओं को अमलीजामा पहनाकर पीठ थपथपा ली गई।
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जी हां कुछ यही हकीकत है बीते चार साल में हुए विकास की। जिले की तरक्की का वादा कर सांसद बने राजवीर सिंह ने जनता की उम्मीदों को परवान चढ़ाया, लेकिन अनजान बनकर उम्मीदें को तोड़ा भी। हालांकि कुछ योजनाओं में काम शुरू भर हुआ, लेकिन जनता के सब्र का बांध अब टूटता नजर आ रहा है।
चार साल पहले लोकसभा चुनाव में जिले की जनता ने अपने प्रतिनिधि के तौर पर राजस्थान के राज्यपाल के पुत्र राजवीर सिंह को संसद में भेजा। सांसद ने चुनाव के बाद जिले के विकास को बड़े-बड़े वादे किए। उनमें कुछ योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में वे कामयाब रहे, लेकिन तमाम योजनाओं को कागजों में बंद रखकर ही इतिश्री कर ली गई। आलम यह रहा कि रेल विस्तार के लिए जिले को बजट मिल गया, लेकिन काम अब तक शुरू नहीं हो सका। फोरलेन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण शुरू हुआ, लेकिन निर्माण का काम सुस्त रफ्तार से चलता रहा। इसके साथ मेडिकल कॉलेज की सौगात भी चार साल बाद जिले को नसीब हो सकी। वहीं अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट, उच्च शिक्षा संस्थान जैसी बड़ी योजनाओं कागजों पर दौड़ती रहीं। इसके साथ ही केंद्र सरकार की योजनाओं के हाल से हर कोई वाकिफ है। ऐसे में जिले के लिए चार साल में बदला कुछ नहीं है। जिले के खाते में भले ही कई प्रोजेक्ट जुड़े हों, लेकिन धरातल पर सब कुछ पहले जैसा ही है। वहीं जिले की जनता को चार साल तक सांसद की गैर मौजूदगी खलती रही। सांसद के जिले में नहीं रहने से जनता में आक्रोश दिखा।
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वादे और हकीकत
1- मेडिकल कालेज का निर्माण: चार साल बाद प्रदेश कैबिनेट से मिली मंजूरी।
2- फोरलेन निर्माण: भूमि अधिग्रहण का काम चल रहा है।
3- एटा-कासगंज रेल विस्तार: बजट मिला, काम शुरू नहीं। अन्य रेल परियोजनाएं अधर में।
4-अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट: बयानबाजी हुई, मगर कुछ नहीं हुआ।
5- ओडीएफ: उत्सवों में शिरकत, हकीकत में जीरो।
6- शिक्षा: कोई विशेष प्रयास नहीं।
7- अलीगंज शराब कांड में सीबीआई जांच की मांग: अब तक शुरू नहीं हुई।
8- उज्जवला योजना: तमाम परिवारों में आज भी बन रही चूल्हे पर रोटी
9- एटा-आगरा सुपरफास्ट: एक साल चली, फिर बंद हो गई।
10- रोजगार: वादे खूब किए, लेकिन युवाओं को रोजगार नहीं मिल सका।

कहते हैं आंकड़े
81 फीसद उपस्थिति रही सदन में
14 बहस में लिया भाग
20 सवाल उठाए सदन में
00 प्राइवेट मेंबर बिल
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