कासगंज। वर्ष 2017 में हुए निकाय चुनाव ने राजनीतिक दलों को गहरे जख्म दिए। इस चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए 133 प्रत्याशी मैदान में रहे। जिसमें से विजेता 10 प्रत्याशियों के अलावा 9 अन्य प्रत्याशियों की ही जमानत बच सकी। जिसमें भाजपा, सपा, बसपा, कांग्रेस के 12 प्रत्याशियों की जमानत बची। वहीं जमानत बचाने वालों में 7 निर्दलीय शामिल रहे। जबकि 114 प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा सके।
चुनाव निकाय का हो या फिर विधायक या सांसद का। चुनावी रण में कूदने को प्रत्याशी बेताब नजर आते हैं, प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतरना ही काफी नहीं होता। उसके लिए मतदाताओं का साथ मिलना भी जरूरी होता है। आयोग से चुनाव मैदान में उतरने वाले प्रत्याशी के लिए कुुल वैध मतों का छठवां हिस्सा लाना होता है। यदि प्रत्याशी इतने वोट प्राप्त नहीं कर पाते तो उनकी जमानत जब्त हो जाती है। जमानत जब्त होने पर प्रत्याशी के द्वारा नामांकन के समय जो राशि जमा की जाती है उसे जब्त कर लिया जाता है।
वर्ष 2017 के निकाय चुनाव की बात की जाए तो इस चुनाव में विजेता 10 प्रत्याशियों के अलावा 7 उपविजेता व 2 तीसरे स्थान पर आने वाले प्रत्याशी ही अपनी जमानत बचा सके। इस चुनाव में भाजपा ने सभी 10 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे। जिसमें से सोरों, गंजडुंडवारा व सिढ़पुरा में भाजपा प्रत्याशी को जीत मिली। इसके अलावा कासगंज व भरगैन में ही पार्टी अपनी जमानत बचा सकी। शेष 5 सीटों पर जमानत जब्त हो गई।
सपा के आठ निकायों में प्रत्याशी मैदान में रहे। जिसमें से बिलराम व भरगैन निकाय में सपा को जीत मिली। जबकि शेष छह निकायों में पार्टी प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई। बसपा 10 सीटों पर चुनाव लड़ी। पार्टी ने मोहनपुर व अमांपुर में जीत हासिल की। वहीं गंजडुंडवारा व पटियाली में पार्टी प्रत्याशी उपविजेता रहे और अपनी जमानत बच सके। शेष 6 निकायों मेंं पार्टी की जमानत जब्त हो गई।
कांग्रेस ने सात सीटों पर चुनाव लड़ा। पार्टी ने किसी भी सीट पर जीत हासिल नहीं की। पार्टी प्रत्याशी मोहनपुर में उपविजेता रहे और उनकी जमानत बच गई। अन्य 6 निकायों में पार्टी प्रत्याशियों की जमानत नहीं बच सकी।
आप तीन सीटों पर चुनाव लड़ी। किसी भी सीट पर जीत नहीं मिली। यहां तक पार्टी तीनों सीट पर अपनी जमानत नहीं बचा पाई। रालोद ने दो सीटों पर चुनाव लड़ा। दोनों सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। दोनों प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा सके।