गोवर्धन (मथुरा)। गिरिराज जी की परिक्रमा के सुंदरीकरण एवं संरक्षण के मामले में एनजीटी न्यायालय ने गिरिराज तीर्थ विकास परिषद के गठन पर नाराजगी जताई है। जज रघुवेंद्र एस राठौर की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने ब्रज तीर्थ विकास परिषद के गठन को लेकर गोवर्धन के लिए अभी तक कोई काम न किए जाने पर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई है।
राजस्थान की ओर से चल रही सुनवाई में कोर्ट ने कहा सिर्फ परिषद के गठन से कुछ नहीं होता है। परिषद का गठन कर खानापूर्ति एवं कोर्ट को गुमराह करने के लिए उन्हीं अधिकारियों की कमेटी बना ली है, जो जिले में अन्य पदों पर कार्यरत हैं। जब वे अपने पदों पर तैनात होते हुए कुछ नहीं कर पा रहे हैं तो परिषद का हिस्सा बन कर क्या कर पाएंगे।
श्राइन बोर्ड का मतलब एक अलग बजट पारित कर कमेटी का गठन होना है। गोवर्धन के लिए राजस्थान और यूपी सरकार मिल कर श्राइन बोर्ड बनाएं। दोनों सरकारों की जिम्मेदारी करोड़ों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा देने की है। प्रशासनिक अधिकारी अलग-अलग राग न अलापें। दोनों राज्यों के प्रशासनिक अधिकारी बैठ कर बात करें।
गौरतलब है कि कोर्ट की अवमानना पर राजस्थान सरकार पर पहले ही एक लाख रुपये का जुर्माना हो चुका है। इसके बाद राजस्थान की ओर से आनन-फानन में गिरिराज जी गोवर्धन तीर्थ विकास परिषद का गठन कर दिया गया। शुक्रवार को उपखण्ड अधिकारी डीग शेर सिंह लुहारिया की अगुवाई में दिल्ली में रिपोर्ट दी थी।
लेकिन कोर्ट ने परिषद के गठन पर नाराजगी जताई और श्रीनाथद्वारा टैंपल बोर्ड की तरह अलग से परिषद का गठन करने को कहा। दूसरी ओर एनजीटी न्यायालय की ओर से नियुक्त किए गए कमिश्नर आनंदवर्धन शुक्ला ने गिरिराज जी की परिक्रमा में धरातल पर की गई समीक्षा रिपोर्ट एनजीटी न्यायालय को सौंप दी। इसमें एनजीटी न्यायालय के अनुपालन में 17 बिंदुओं के कार्यों पर प्रगति नहीं मिली है।