सर्व शिक्षा अभियान के तहत युवतियों को जूडो-कराटे सीखने की योजना विभागीय उदासीनता के चलते फाइलों में दबी पड़ी है। गत वर्ष अक्तूबर माह में बनी इस योजना के तहत उच्च प्राथमिक स्कूलों की छात्राओं को छह माह का प्रशिक्षण दिया जाना था। अफसोस कि अब तक एक भी कैंप नहीं लग सके हैं।
बलात्कार, छेड़छाड़ और यौन अपराधों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। दिल्ली कांड के बाद तो पूरे देश में गुबार है। दरिंदों से निपटने को जूडो-कराटे और ताईक्वांडो की ट्रेनिंग लेने की सीख दी जा रही है।
वर्ष 2012 के अक्तूबर माह में ही सर्व शिक्षा अभियान के तहत ऐसी योजना बनी थी जिसमें उच्च प्राथमिक स्कूलों की बच्चियों को जूडो-कराटे और ताईक्वांडो में ट्रेंड करना था। इसके लिए आगरा में छह समेत पूरे प्रदेश में प्रशिक्षण शिविर लगाए जाने थे।
बच्चियों के लिए किट सहित अन्य सुविधाओं के लिए प्रति सेंटर 60 हजार रुपये की धनराशि भी स्वीकृत की गई। कैंप बीते साल अक्टूबर से मार्च तक संचालित होने थे। लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही से योजना धरातलीय रूप नहीं ले सकी।
हालत यह है कि मार्च का महीना गुजरने को है और एक भी स्थान पर कैंप नहीं लग सके। इस संबंध में जब बीएसए देवेंद्र प्रकाश यादव से बात की गई तो उन्होंने बोर्ड परीक्षा में व्यस्त होने की बात कही। साथ ही ऐसी किसी योजना की जानकारी से इनकार किया।
शहर सेंटर आवंटित धनराशि(लाखों में)
आगरा छह 3.600
अलीगढ़ सात 4.200
फीरोजाबाद नौ 5.400
इटावा तीन 1.800
एटा आठ 4.800
हाथरस आठ 4.800
मैनपुरी पांच 3.000
मथुरा पांच 3.000