आरुषि-हेमराज मर्डर केस में गाजियाबाद सीबीआई विशेष कोर्ट ने तलवार दंपति को तगड़ा झटका दिया है। विशेष न्यायाधीश एस. लाल ने डिफेंस के कुल 13 गवाहों में से सिर्फ 7 को ही बयान दर्ज कराने की अनुमति दी है।
यूपी के एडीजी कानून व्यवस्था अरुण कुमार समेत 6 लोगों को यह कहते हुए गवाह के रूप में स्वीकार करने से इंकार कर दिया कि इन गवाहों को साक्षी के रूप में तलब किये जाने का कोई औचित्य नहीं बनता।
इसके अलावा दो अन्य अर्जियों को भी खारिज कर दिया है। कोर्ट ने चार गवाहों को समन जारी करते हुए 20 जून को गवाही के लिए तलब किया है।
मंगलवार को इन तीनों अर्जियों का निस्तारण करते हुए कोर्ट ने डा. आरके शर्मा, डा. उर्मिल शर्मा, डा. अमूल्या चड्ढा, राजेंद्र कौल, मासूमा झा, विकास सेठी और महेंद्र शर्मा को गवाही की अनुमति प्रदान करते हुए उन्हें समन जारी करने के आदेश दिए हैं।
सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह गवाही के दिन ही गवाह आरके शर्मा को सिर्फ गोल्फ स्टिक का निरीक्षण कराना सुनिश्चित करे। यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि उपरोक्त गवाहों के पते गलत पाए जाते हैं तो उनको पुन: समन जारी नहीं किया जाएगा।
डिफेंस के अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर, मनोज शिशौदिया और सत्यकेतु सिंह ने 12 जून को अपने 13 गवाहों की सूची सीबीआई विशेष कोर्ट में पेश की थी।
इन 13 गवाहों में यूपी पुलिस के एडीजी कानून व्यवस्था अरुण कुमार, एम्स से रिटायर्ड डाक्टर आरके शर्मा, अपोलो की लेडी डाक्टर उर्मिल शर्मा, डेंटिस्ट अमूल्या चड्ढा, डॉ. रिचा सक्सेना, गांधीनगर गुजरात के फोरेंसिक एक्सपर्ट एसएल वाया, राजेंद्र कौल, मासूमा झा, विकास सेठी, महेंद्र शर्मा, एयरटेल-वोडाफोन के नोडल आफिसर और सुप्रीम कोर्ट केरजिस्ट्रार शामिल थे।
इसके अलावा डिफेंस ने दो और अर्जियां देकर नौकर कृष्णा, विजय, राजकुमार के नार्को, ब्रेन मैपिंग और अन्य टेस्ट रिपोर्ट को रिकार्ड पर लेने और गवाह आरके शर्मा को फोरेंसिक रिपोर्ट से संबंधित पत्रावलियों के निरीक्षण की अनुमति मांगी थी। सीबीआई के लोक अभियोजक बीके सिंह और वीके शर्मा ने अर्जियों पर अपना विरोध दर्ज कराया था।