लखनऊ। मड़ियांव क्षेत्र में शनिवार सुबह बांस-बल्ली पर खिंचे बिजली के तारों से उतरे करंट की चपेट में आकर एक मजदूर की मौत हो गई। वहीं, सूचना देने के बाद भी क्षेत्रीय बिजली इंजीनियर मौका-मुआयना करने नहीं पहुंचे और सीमा विवाद होने की वजह से लोगों एक से दूसरे उपकेंद्र पर शिकायत दर्ज कराने के लिए टरकाया जाता रहा। बाद में पुलिस ने शव का पंचनामा किया।
पुलिस के मुताबिक मड़ियाव थाने के पीछे स्थित नौबस्ता खुर्द गायत्री नगर (तृतीय) निवासी सुशील कुमार (32) खाली प्लॉट में झोपड़ी डालकर अपनी पत्नी व परिवार के साथ रहता था। सुबह करीब छह बजे वह प्लॉट में भरे पानी को बाहर निकाल रहा था। इस दौरान सुशील ने प्लॉट की दीवार का सहारा लिया, लेकिन इसे छूते ही चीख निकली और वह छटपटाने लगा। पत्नी रीता के शोर मचाने पर आनन-फानन में लोगों ने लकड़ी से बांस-बल्ली के सहारे जा रही केबल को दीवार से हटाया। इसके बाद सुशील छूटा। लोग उसे लेकर पास स्थित अस्पताल पहुंचे। वहां से ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। हालांकि इलाज शुरू होता, इससे पहले उसकी मौत हो गई।
लोगों में गहरी नाराजगी
गायत्रीनगर के लोगों ने इस घटना की सूचना पहले जीएसआई उपकेंद्र पर दी तो जवाब मिला कि ये इलाका अब डालीगंज खंड के तहत अहिबरनपुर उपकेंद्र के अधीन है। अहिबरनपुर उपकेंद्र पर सूचना दी गई तो कर्मियों ने इंजीनियरिंग कॉलेज उपकेंद्र पर बताने का सुझाव दिया। बाद में पता चला कि दो खंडों के सीमा विवाद के चलते लेसा का कोई इंजीनियर मौका-मुआयना करने नहीं पहुंचा। लेसा के इस रवैये से नाराज लोगों ने पोस्टमार्टम हाउस के सामने हंगामा करके नाराजगी व्यक्त की।
घर में आने वाली थी खुशियां
हादसे ने सुशील के परिवार को तोड़कर रख दिया है। उसकी पत्नी रीता गर्भवती है। उसकी डिलवरी की तिथि भी करीब है। पति की मौत के बाद रीता का रो-रोकर बुरा हाल है। एक साल पहले ही दोनों की शादी हुई थी। सुशील मेहनत मजदूरी करके घर का खर्च चलाता था। परिवार में पत्नी के अलावा माता-पिता और भाई हैं।