लखनऊ । फेफड़ों की बीमारियों में अब सर्जरी आसान होगी। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में पल्मोनरी सर्जरी यूनिट को भी हरी झंडी मिल गई है। शासन ने नई यूनिट खोलने की अनुमति देने के साथ ही नौ नए पद भी सृजित कर दिए हैं। प्रदेश में ये अपने तरह की पहली यूनिट होगी, जहां फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों की सर्जरी की अलग व्यवस्था की गई। इस यूनिट में मरीजों की भर्ती के लिए 20 बेड होंगे। केजीएमयू प्रशासन के अनुसार पल्मोनरी सर्जरी यूनिट का प्रभारी एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुरेश कुमार को बनाया गया है। उनके अलावा इस यूनिट में दो सर्जन, एक एनेस्थेटिस्ट, दो सीनियर रेजीडेंट और चार जूनियर रेजीडेंट भी होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार सीने की चोट, फेफड़ों की टीबी, फेफड़े का कैंसर आदि की बीमारियों में सर्जरी की जरूरत पड़ती है। जनरल सर्जरी विभाग की ओपीडी में 40 से 45 मरीज इन बीमारियों के आते हैं। इनमें से 3 से 4 मरीजों को ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है। विशेषज्ञों के अनुसार टीबी के 80 से 90 फीसदी मरीजों को दवा से ठीक किया जा सकता है लेकिन 10 से 12 फीसदी मरीज ऐसे होते हैं जिनकी सर्जरी करना जरूरी होता है। इसके अलावा सड़क दुर्घटनाओं में भी सीने पर गंभीर चोटें आती हैं। कुल सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में 12 से 20 फीसदी सीने की चोट होते हैं। अभी तक इस तरह की सभी सर्जरी डॉ. सुरेश कुमार करते थे। अब पल्मोनरी सर्जरी यूनिट बनाकर फेफड़ों की सर्जरी की अलग व्यवस्था की गई है। सर्जन, एनेस्थेटिस्ट और रेजीडेंट डॉक्टरों के मिलने से मरीजों को अलग विशेष सुविधाएं मिल सकेंगी।
रेडियोथेरेपी और स्किन विभाग को मिले बेड ः केजीएमयू प्रशासन ने रेडियो थेरेपी विभाग के लिए 18 और स्किन विभाग के लिए 20 बेड की व्यवस्था की है। सर्जरी विभाग के वार्ड नंबर दो में ये व्यवस्था की गई है। इसके अलावा आर्थोपैडिक विभाग के ऑपरेशन थिएटर के कुछ हिस्से को रेडियोडायग्नोसिस विभाग को दिया गया है। वहां डीएसए जांच की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। इसके अलावा सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग की मैमोग्राफी मशीन को रेडियो डायग्नोसिस विभाग में शिफ्ट किया जाएगा।