लखनऊ। गरीबों के राशन में हर माह लाखों का खेल कर रहे शहर के कोटेदारों को अब पुलिस का खाद्य प्रकोष्ठ बेनकाब करेगा। बड़े स्तर पर चल रहे गोरखधंधे की लगातार शिकायतों को देखते हुए शासन ने जांच केआदेश दिए हैं। साथ ही साथ कार्रवाई केलिए एक डिप्टी एसपी को भी नामित किया है। इतना ही नहीं मुख्यालय स्तर से दर्जन भर से अधिक संदिग्ध कोटेदारों के नाम भी बताए गए हैं।
शहर के कुछ कोटेदार पर गिरोह बनाकर गरीबों के हिस्से का राशन बाजार में बेचने के आरोप हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक यह काम फर्जी राशन कार्डों के सहारे किया जा रहा है। कालाबाजारी करने वाले कोटेदारों ने विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत कर अपने स्तर से हजारों फर्जी राशन कार्ड बनवा रखे हैं। उसी के आधार पर उनका हर माह कोटा तय होता है। फर्जी राशन कार्डों पर वितरण दिखाकर सस्ते दामों का खाद्यान्न खुले बाजार में बेचते हैं। इस गोरखधंधे की पोल खोलने में कुछ कोटेदार भी लगे हैं। ऐसी शिकायतों का संज्ञान लेते हुए अब शासन ने विशेषज्ञ एजेंसी से जांच कराने का निर्णय लिया है। विभाग के प्रमुख सचिव के निर्देश पर प्रदेश पुलिस के खाद्य प्रकोष्ठ को जांच दी गई है। वहां के एक डिप्टी एसपी को जांच केलिए नामित किया गया है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक डिप्टी एसपी की टीम जिलापूर्ति अधिकारियों के सहयोग से जांच करेगी। उसके निशाने पर शहर के करीब दर्जन कोटेदार हैं जिनके पर राशन की कालाबाजारी करने के आरोप लगाए गए हैं। उनमें हजरतगंज, लालबाग, आलमबाग, तेलीबाग, हुसैनगंज, बाजारखाला इलाके के कई कोटेदारों के नामों का उल्लेख भी किया गया है।
एडीएम पर भारी पड़े थे कोटेदार
शहर में फर्जी राशन कार्डों की जांच पर कई बार धंधेबाज कोटेदारों का रसूख भारी पड़ा है। करीब दो साल पहले राजधानी के तत्कालीन एडीएम (आपूर्ति) उमेश मिश्र ने कुछ शिकायतों के आधार पर संदिग्ध कोटेदारों के क्षेत्र के कार्डों की पड़ताल शुरू की। सैकड़ों फर्जी राशन का कार्ड पकड़ में आए। उसके आधार पर एडीएम की कार्रवाई शुरू होने से पहले धंधेबाज कोटेदारों ने अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए जांच को ठंडे बस्ते में डलवा दिया। जबकि एडीएम ने शहर में करीब दो लाख फर्जी राशन कार्ड इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई थी। उसके बाद जनपद स्तरीय किसी अधिकारी ने फर्जी राशन कार्डों की जांच के लिए कोई ठोस पहल नहीं की।