लखनऊ। मोहनलालगंज के धनवारा गांव के एक मजदूर की पत्नी व उसकी पुत्री की जान डाक्टरों की लापरवाही की भेंट चढ़ गई। मजदूर अपनी पत्नी को लेकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकता रहा, लेकिन कहीं भी उसे इलाज नहीं मिला। आर्थिक रूप से कमजोर मजदूर की पत्नी ने घर में ही प्रसव पीड़ा से तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।
धनवारा गांव निवासी मजदूर वंश बहादुर की गर्भवती पत्नी श्रीमती (30) को मंगलवार को प्रसव पीड़ा हो रही थी। वंश बहादुर उसे किसी तरह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गया। वहां मौजूद डॉक्टर ने महिला की हालत गंभीर बताते हुए हजरतगंज स्थित झलकारीबाई महिला अस्पताल भेज दिया। झलकारी बाई पहुंचे वंश बहादुर को डॉक्टरों ने बताया कि उसकी पत्नी को खून की कमी है और उसे क्वीन मेरी अस्पताल ले जाने की सलाह दी। गरीब वंश बहादुर के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह निजी वाहन से पत्नी को क्वीनमेरी ले जाए। उसने मदद के लिए अस्पताल प्रशासन से कहा लेकिन किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। हर तरफ से निराश वंश बहादुर पत्नी को लेकर घर आ गया। पत्नी को दर्द से तड़पता देख वंश बहादुर उसे एक निजी अस्पताल ले गया लेकिन पैसा न होने के कारण उसका इलाज नहीं किया गया। तीन दिन तक इधर-उधर भटकने के बाद शुक्रवार शाम श्रीमती ने एक मृत बच्ची को जन्म देकर दम तोड़ दिया।