फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मौत के बाद भी खत्म नहीं हो रहा इंतजार

Thu, 13 Jun 2013 05:30 AM IST
Lucknow
विज्ञापन
विज्ञापन
केस - 1
विज्ञापन

छावनी परिषद में तैनात सफाईकर्मी मुन्नी जयगोपाल की 12 सितंबर 2011 को ड्यूटी पर मौत हो गई। उनकी मौत के बाद ग्रेच्युटी और पेंशन के लिए नामित बेटी कमलेश आज तक छावनी परिषद के चक्कर काट रही हैं। आश्रित कोटे के तहत कमलेश के बेटे राहुल को नौकरी मिलनी थी, लेकिन यह प्रक्रिया भी डेढ़ साल से ठंडे बस्ते में है। पेट पालने के लिए कमलेश निजी ठेकेदार के यहां सफाई का काम कर रही है, जिसकी एवज में उसे 18 सौ रुपये प्रतिमाह मिल रहा है। घर चलाने के लिए कमलेश पर कर्जा चढ़ रहा हेै। बेटी काजल का 11वीं में एडमिशन के लिए ही कमलेश के पास पैसे नहीं रह गए हैं।

केस - 2
छावनी परिषद कर्मचारी मैकू जून 2008 में सेवानिवृत्त हुए थे। बीमारी के चलते 27 अगस्त 2008 को उनकी मौत हो गई। पत्नी रामा देवी परिवार का भरण पोषण करने के लिए पति के बकाए ग्रेच्युटी और पेंशन सहित सभी देनदारियों के लिए आज भी छावनी परिषद मुख्यालय के चक्कर काट रही हैं। बेटे विजेंद्र और बेटी दीपमाला की परवरिश के लिए अब उसके पास पैसे नहीं है।
विज्ञापन



लखनऊ। छावनी परिषद प्रशासन की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को दर्शाते ये दो मामले तो सिर्फ बानगी भर हैं। छावनी परिषद की 35 से 40 साल की लंबी सेवा के बावजूद आज तक दर्जनों कर्मचारियों को उनकी ग्रेच्युटी और पेंशन सहित अन्य सभी देयों का भुगतान नहीं हो सका है। परिषद कर्मचारी मुन्नी की ड्यूटी के दौरान जुलाई 2008 में मौत हो गई थी।
उनके बाद पति श्यामलाल की भी मौत हो गई। अब उनके घर में तीन बच्चे शिवानी, शंकर और मनोज हैं, लेकिन पेंशन और ग्रेच्युटी के साथ मृतक आश्रित कोटे के तहत नौकरी के लिए इनके चक्कर भी अब तक कट रहे हैं। रक्षा मंत्रालय की सेवा नियमावली के अनुसार सेवानिवृत्ति के दो माह के भीतर ही सभी कर्मचारियों के बकाए देयों का भुगतान हो जाना चाहिए। लखनऊ छावनी परिषद के लेखा अनुभाग की लापरवाही का खामियाजा सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है।
विज्ञापन

कई साल तक भटकने के बाद भी पेंशन नहीं मिल रही है। इस बीच कई कर्मचारियों की तो मौत तक हो गई है। लेखा अनुभाग स्थानीय ऑडिट कार्यालय में पेंशन और ग्रेच्युटी की स्वीकृति की बात कहकर कर्मचारियों को टाल रहा है जबकि उनकी मौत के बाद आश्रितों को पेंशन देने के लिए जिला प्रशासन से उत्तरदायित्व पत्र मांगा जा रहा है। कई आश्रितों ने उत्तरदायित्व पत्र जमा भी कराए, लेकिन अब तक उनकी फाइल मंजूरी के इंतजार में धूल खा रही है। उधर, मध्य यूपी सब एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग व छावनी परिषद अध्यक्ष मेजर जनरल सुरेश गुप्ता का कहना है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के बारे में उनको कोई जानकारी नहीं है। इस बारे में छावनी परिषद प्रशासन ही कुछ बता सकता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें