लखनऊ। इटौंजा-कठवारा मार्ग पर बरगदी कलां मोड़ पर मंगलवार शाम हादसे में घायलखून से लथपथ हाईस्कूल का छात्र घंटों सड़क पर तड़पता रहा। मगर, कोई मदद को आगे नहीं आया। सूचना के करीब डेढ़ घंटे बाद पुलिस व 108 नंबर एंबुलेंस पहुंची, तब तक छात्र दम तोड़ चुका था। जबकि उसके चचेरे भाई को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शादी समारोह में शामिल होने निकले दोनों भाईयों की बाइक को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी। ठोकर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक कई फीट हवा में उछलकर सड़क किनारे खेत में जा गिरी और दोनों भाई गंभीर रूप से घायल हो गए।
गाजीपुर के गांव बस्तौली निवासी तिलक रावत का बेटा राहुल अपने चचेरे भाई मंजीत के साथ मंगलवार शाम बाइक से बीकेटी के गांव शिवपुरी में आयोजित एक शादी समारोह में जा रहा था। इटौंजा-कठवारा रोड पर बरगदी कलां मोड़ के पास बाइक को एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। बाइक सड़क से पचास मीटर दूर खेत में जा गिरी और राहुल व मंजीत गंभीर रुप से घायल हो गये। ग्रामीणों ने बीकेटी, इटौंजा थाने के साथ ही पुलिस कंट्रोल रुप व समाजवादी स्वास्थ्य सेवा की एंबुलेस को फोन पर हादसे की जानकारी दी। इसके बावजूद डे़ढ घंटे तक मदद नहीं पहुंची। इस दौरान तमाम राहगीर भी गुजरे लेकिन कोई मदद के लिए आगे नहीं बढ़ा और गंभीर रूप से घायल हाईस्कूल के छात्र राहुल ने दम तोड़ दिया। इसी दौरान उधर से गुजर रहे भाकियू जिलाध्यक्ष हरिनाम सिंह वर्मा भीड़ देख रुक गए। साथियों की मदद से मंजीत को पास के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराने के साथ ही इटौंजा पुलिस को जानकारी दी। इसके बाद पहुंची पुलिस ने परिवार के लोगों जानकारी देने के साथ ही राहुल के शव को पोस्टर्माटम के लिए भेजा। मृतक के पिता तिलक, मां सुमन, छोटे भाई अंशुल व बहन साधना का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस की लापरवाही से गुस्साए ग्रामीण इटौंजा-कठवारा मार्ग पर जाम लगाने पर आमादा हो गए। बाद में किसी तरह उन्हें समझाया जा सका। एसओ इटौंजा विनोद यादव ने बताया कि हादसे की सूचना देर से मिली थी, जानकारी मिलते ही पुलिस भेजी गई थी।
तो बच जाती जान
हादसे के बाद दोनों युवक करीब डेढ़ घंटे तक खून से लथपथ सड़क पर पड़े दर्द से तड़पते रहे। इसी दौरान दर्जनों की संख्या में ग्रामीणों जुट गए, लेकिन सब तमाशबीन ही बने रहे। किसी ने भी पुलिस केस के चलते घायलों को अस्पताल तक ले जाने की जहमत नहीं उठाई। अगर, समय रहते राहुल को अस्पताल पहुंचा दिया जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी।
रिजल्ट तक नहीं देख सका राहुल
राहुल हाईस्कूल का छात्र था। घर में सबसे बड़ा होने के कारण वह अपने पिता के कामकाज में हाथ भी बंटाने लगा था। उसने इसी वर्ष यूपी बोर्ड से हाईस्कूल की परीक्षा दी थी। जून में रिजल्ट आना था, राहुल बेसब्री से उसका इंतजार था। लेकिन रिजल्ट आने से पहले ही हादसे ने उसकी जिंदगी छीन ली।