फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भाई के एक्सीडेंट की सूचना दे लगाई चपत

Sun, 26 May 2013 05:30 AM IST
Lucknow
विज्ञापन
विज्ञापन
लखनऊ। एक जालसाज ने निजी अस्पताल के कर्मचारी को फोन कर सीतापुर में उसके भाई के एक्सीडेंट की सूचना दी। अस्पताल का बिल चुकाने के नाम पर अपने खाते में साढ़े तीन हजार रुपये जमा करा लिए। परेशान युवक आननफानन में सीतापुर पहुंचा। बताए गए नाम का वहां कोई अस्पताल ही नहीं मिला, जबकि भाई भलाचंगा था। दो दिन बाद ठग ने फोन किया और कहा कि भाई मर गया है। खाते में जमा कराए रुपयों से अंतिम संस्कार कराने के साथ ही बची रकम बीयर पीकर थकान उतारने में खर्च कर दी। ठगी का शिकार बने युवक ने एसएसपी से शिकायत की है।
विज्ञापन

एसएसपी ऑफिस के सामने एक निजी अस्पताल में कार्यरत ज्ञानेश शुक्ला ने बताया कि 15 मई को दोपहर दो बजे वह खदरा स्थित अपने घर जाने के लिए निकला ही था कि मोबाइल की घंटी बजी। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को अश्विन चौधरी बताते हुए कहा कि तुम्हारे भाई दिव्य प्रकाश का सीतापुर में एक्सीडेंट हो गया है। सड़क किनारे बेहोश मिले दिव्य प्रकाश को सूरज हास्पिटल में भर्ती कराया है, तुरंत आ जाओ। थोड़ी देर बाद फिर उसने कॉल किया और कहा कि अस्पताल में साढ़े तीन हजार रुपये जमा करने हैं। भाई के एक्सीडेंट की सूचना से घबराए ज्ञानेश ने कहा कि रुपये लेकर पहुंच रहा हूं। पांच मिनट बाद फिर फोन आया और कॉल करने वाले ने कहा कि अस्पताल वाले मान नहीं रहे हैं, तुरंत पैसे जमा कराने हैं। मेरे खाते में साढ़े तीन हजार जमा कर दो ताकि इलाज शुरू हो सके। झांसे में आए ज्ञानेश ने एसबीआई के बताए गए खाते में रुपये जमा करा दिए। इसके बाद सीतापुर पहुंचकर सूरज हॉस्पिटल की तलाश शुरू की, पता चला इस नाम का कोई अस्पताल है ही नहीं। इस बीच फोन करने वाले के नंबर पर कॉल की, फोन बंद मिला। भाई दिव्य प्रकाश का फोन पहले से ही बंद था। घबराया अश्विन अपने भाई के साथी के पास पहुंचा। वहां दिव्य प्रकाश भलाचंगा बैठा था। पता चला कि खराब होने के कारण चार-पांच दिन से उसका मोबाइल बंद है।
ठगी का शिकार बने ज्ञानेश ने अपने परिचितों की मदद से तहकीकात शुरू की। पता चला कि जिस खाते में उसने साढ़े तीन हजार रुपये जमा किए थे वह गुजरात के मेहसाना स्थित एसबीआई में अश्विन भाई बाबा भाई चौधरी के नाम से है। ज्ञानेश ने फोन करने वाले के नंबर पर कई बार काल की। मोबाइल लगातार बंद मिला। दो दिन बाद 17 मई को ज्ञानेश के पास ठग ने फोन किया और कहा कि दिव्य प्रकाश की मौत हो गई थी। खाते में जमा कराई रकम से उसका अंतिम संस्कार किया, बची रकम से बीयर पीकर थकान उतारी है। झुंझलाए ज्ञानेश ने उसे खरीखोटी सुनाने के साथ एसएसपी से शिकायत की है। एसएसपी ने कैसरबाग पुलिस को कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें