लखनऊ। राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट प्रशासन ने बृहस्पतिवार को एक मरीज की लाश को दो घंटे तक इस वजह से रोके रखा कि गरीब परिवार वाले इलाज का खर्च नहीं दे पाए। इस बात से नाराज किसान यूनियन के नेताओं ने अस्पताल के निदेशक का घेराव कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। जिलाधिकारी ने मामले की जानकारी मिलने के बाद सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल शव देने का आदेश दिया। इसके बाद मामला शांत हुआ।
मोहनलालगंज के नारायण खेड़ा निवासी राम शंकर यादव (61) कैंसर से पीड़ित थे। उनके परिवार वालों ने एक माह पहले राममनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट में भर्ती कराया। मरीज के परिवार वालों ने इलाज के महज दो हजार रुपए जमा किए थे। अस्पताल के अधिकारियों ने एडवांस रुपए जमा करने को कहा तो मरीज के परिवार वालों ने गरीबी का हवाला देते हुए बाद में पैसों की व्यवस्था करने का भरोसा दिलाया। अस्पताल के अधिकारियों ने मरीज को भर्ती कर के इलाज शुरू कर दिया। एक माह तक मरीज के तीमारदार बकाया भुगतान बाद में करने की बात करते रहे। बृहस्पतिवार दोपहर मरीज की इलाज के दौरान मौत हो गई। मरीज के परिवार वाले शव लेने पहुंचे तो वहां बैठे कर्मचारियों ने बकाया भुगतान करने के बाद शव देने की बात कही। मरीज के परिवार वाले रुपए न होने की बात कहकर शव देने की गुहार करते रहे। इस पर पर अस्पताल के अधिकारियों का दिल नहीं पसीजा। कुछ देर में ही किसान यूनियन के एक नेता के नेतृत्व में पहुंचे लोगों ने निदेशक कार्यालय का घेराव कर लिया और हंगामा करते हुए नारेबाजी करने लगे। अधिकारियों के काफी समझाने के बाद भी प्रदर्शनकारी नहीं माने। आखिर में जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रशासन को तत्काल शव देने का आदेश दिया। इसके बाद अस्पताल के अधिकारियों ने शव दिया। राम शंकर के लड़के सूरज पाल ने बताया कि अस्पताल ने दो घंटे तक लाश नहीं दी। डीएम के आदेश के बाद उनके परिवार को शव सौंपा गया।