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एटीएम कार्ड के नंबर रटकर की लाखों की ठगी

Fri, 05 Apr 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। एटीएम बूथ पर लोगों की मदद करने के बहाने उनके एटीएम कार्ड के नंबर पता लगाकर साइबर अपराध के एक शातिर ने ऑनलाइन शॉपिंग कर दर्जनों लोगों को लाखों रुपये का चूना लगा दिया। गुरुवार को लखनऊ पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने इस शातिर को राजधानी में अक्सा कॉलोनी तालाब के पास धर दबोचा। उसके पास से ऑनलाइन शॉपिंग से मंगवाए गए दर्जनों सामान भी बरामद हुए हैं, जिनमें अधिकतर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हैं। आरोपी ने बताया कि एक साल के दौरान उसने 10 से अधिक लोगों को ठगा। ठगी के शिकार बने जानकीपुरम थाने में नियुक्त कांस्टेबल रामसेवक भार्गव ने गत 10 जनवरी को हजरतगंज स्थित साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई थी। भार्गव ने बताया कि सिधौली सीतापुर स्थित एसबीआई के खाते में उनका वेतन आता है। 17 दिसंबर 2012 को जब उन्होंने अपने खाते से 30 हजार रुपये निकालने चाहे तो वे नहीं निकले हालांकि खाते से यह रकम काट ली गई। उन्हाेंने इसकी शिकायत सिधौली में बैंक अधिकारियों से की। इस बीच 23 और 24 दिसंबर को उनके खाते से 82,376 की ऑनलाइन खरीदारी कर ली गई, जबकि एटीएम कार्ड उनकी जेब में ही था। 27 दिसंबर को उन्होंने फिर से 5 हजार रुपये निकालने चाहे लेकिन ट्रांजेक्शन फेल हो गया और बताया गया कि खाते में पर्याप्त राशि नहीं है। इस पर उन्हाेंने साइबर क्राइम सेल में शिकायत की। सेल ने एसबीआई से उनके खाते की विस्तृत जानकारी निकलवाई तो सामने आया कि उनके एटीएम कार्ड से ई-बे, जेबॉन्ग, ट्रेडस आदि ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइटों पर खरीददारी करके भुगतान किया गया है। बैग इट टुडे नामक ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट से 21,889 रुपये का सैमसंग का 29 इंच एलईडी टीवी और 14,999 का नोकिया लूमिया स्मार्टफोन खरीदा गया। पुलिस ने इनके डिलीवरी एड्रेस हासिल किए तो मालूम हुआ कि इसे तौशीब अहमद ने खरीदा है। वह मूलत: हरदोई के माधवगंज में जैदीपुर गांव का निवासी है और डिलीवरी एड्रेस लखनऊ में अक्सा कॉलोनी तालाब स्थित अंधे की चौकी के पास एक घर का था। यहां वह मकान मालिक अकील अहमद के पास किराए से रह रहा था।
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बरामद हुआ सामान ः तौशीब के पास से एलईडी टीवी, वायरलैस कैमरा व रिसीवर, 250 जीबी की एक्सटर्नल हार्ड डिस्क, छह सेलफोन, म्यूजिक वूफर सिस्टम, कई किस्म के सॉफ्टवेयर की सीडियां, टीवी ट्यूनर कार्ड व रिमोट और एक इलेक्ट्रॉनिक मीटर बरामद किए गए हैं।
कई बैंकों के कार्डों से ठगी ः आरोपी तौशीब ने सिर्फ रामसेवक भार्गव ही नहीं, कई अन्य लोगों के एटीएम कार्डों के नंबर भी पता लगाए और ठगी की। एसबीआई के 4, बैंक ऑफ इंडिया के 2, इलाहाबाद बैंक का 1, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स का 1, यूको बैंक का 1 और पीएनबी के 1 कार्ड के नंबर तौशीब के पास से बरामद हुए हैं। पूछताछ में और नई जानकारियां सामने आ रही हैं। अभी तक करीब डेढ़ लाख की शॉपिंग की बात तौशीब ने स्वीकारी है। हालांकि जितने कार्डों से ठगी की बात वह स्वीकार रहा है, पुलिस को आशंका है कि ठगी इससे कहीं ज्यादा बड़ी है।
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‘लोग मदद मांगते और मैं याद कर लेता एटीएम कार्ड का नंबर’ ः ऑनलाइन शॉपिंग के लिए जरूरी एटीएम कार्ड का नंबर, उसकी एक्सपायरी डेट और सीवीवी नंबर को एक पल में याद कर लेना बहुत मुश्किल काम है। ‘अमर उजाला’ ने तौशीब से ही पूछा कि उसने कैसे अपनी ठगी को अंजाम दिया तो उसने बताया कि वह भीड़भाड़ वाले एटीएम के आसपास खड़ा रहता था। जैसे ही कोई एटीएम बूथ के अंदर जाता, वह भी चला जाता। कई बार जब लोगों को कार्ड ऑपरेट करना नहीं आता तो वे उससे मदद मांगते। वह उन्हें बताता कि कार्ड को किस ओर से डालें, कैसे पिन नंबर डालें और पैसे निकालें। इस दौरान वह बार-बार कार्ड को देखता और नंबर याद कर लेता। इसके तुरंत बाद इन नंबरों को वह मोबाइल में फीड कर लेता और डायरी में भी लिख लेता। रामसेवक भार्गव के केस के बारे में तौशीब ने बताया कि 17 दिसंबर को उनके कार्ड से जब रुपए नहीं निकले तो उन्हाेंने ही मदद मांगी थी, तब रुपए तो नहीं निकले लेकिन उसने उनके कार्ड के तमाम नंबर नोट कर लिए और फिर ऑनलाइन शॉपिंग की।
10वीं पास, कंप्यूटर साक्षर ः तौशीब ने बताया कि वह दसवीं पास है। 12वीं में फेल होने के बाद उसने कंप्यूटर कोर्स किया था। उसके माता-पिता इस दुनिया में नहीं हैं। उधारी का पैसा चुकाने के लिए एक साल से वह एटीएम कार्ड से ठगी की ओर आकर्षित हुआ। उसका अपना बैंक खाता था, जिसके डेबिट कार्ड से उसने पहले ऑनलाइन शॉपिंग की सभी बारीकियों को सीखा और कमजोरियों को तलाशा। पाया कि कार्ड के नंबर पता हों तो ऑनलाइन शॉपिंग संभव है। इस बीच वह लखनऊ आ गया और यहीं रहने लगा। यहां उसकी एक गर्ल फ्रेंड भी बनी, जिसके लिए तोहफे खरीदने के लिए भी उसने भरपूर ऑनलाइन शॉपिंग की। बाजारवाद की चपेट में आकर अक्सर वह ऐसी चीजें भी खरीद लेता जिनकी उसे जरूरत नहीं होती, इससे खर्चे लगातार बढ़ने लगे और उसने ज्यादा से ज्यादा ठगी शुरू कर दी। 10 ग्राम का सोने का सिक्का भी खरीदा जिसे बेचकर आने काम लायक नगदी का इंतजाम किया।
पकड़ा गया तो पैसे देकर छूटा ः ठगी में वह हमेशा सफल नहीं रहा। तौशीब ने बताया कि उसने अपने ही जान-पहचान के कुछ लोगों के एटीएम कार्ड नंबर हासिल कर ठगी की थी, लेकिन वे इसे जान गए और हरदोई के संदीला थाने में मामला दर्ज करा दिया। तब उसने पीड़ितों को उनकी रकम लौटाई और पुलिस को भी रुपए देकर छूट गया। इस दौरान उसने पुलिस व पीड़ितों को करीब 75 हजार रुपए दिए।
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