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फर्जीवाड़े के आरोपी लविवि कर्मचारियों की बढ़ीं मुश्किलें

Mon, 01 Apr 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। फर्जी मार्कशीट एवं डिग्री बनाने के आरोप में फंसे लखनऊ विश्वविद्यालय के नौ कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। लगभग डेढ़ महीने पहले इस मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद एसएसपी ने संबंधित थानों की पुलिस को इन कर्मचारियों को गिरफ्तार कर सूचित करने का आदेश दिया है।
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लखनऊ विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री लगाकर मुजफ्फरनगर डायट में बीटीसी में प्रवेश लेना अभ्यर्थियों के साथ ही लविवि कर्मचारियों पर भी भारी पड़ा है। 3 जनवरी 2011 को डायट के तत्कालीन प्राचार्य एसएम सिद्दीकी ने फर्जी डिग्री के लिए 18 अभ्यर्थियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। स्थानीय पुलिस मामले की जांच कर चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में थी, तभी मामले की जांच सीबीसीआईडी को दे दी गई। सीबीसीआईडी ने फर्जी अभ्यर्थियों का सच तो उजागर किया ही, उसके हाथ फर्जी डिग्री के धंधेबाजों के गिरेबान तक भी पहुंच गए। लविवि के नौ कर्मचारी भी इस मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं। इनमें परीक्षा विभाग में कार्यालय अधीक्षक अनिल श्रीवास्तव, वरिष्ठ लिपिक आरडी दुबे एवं नैत्यिक लिपिक अजीत सिंह, रामजी राम, आलोक वर्मा, धीरेंद्र शुक्ला, सुनील सिंह, राजेश श्रीवास्तव एवं अजय श्रीवास्तव शामिल हैं। इनके पते के आधार पर स्थानीय पुलिस को 16 फरवरी को ही इन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के निर्देश जारी हो गए थे, लेकिन अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। राजधानी पुलिस वारंटियों की गिरफ्तारी का अभियान चला रही है। इसी कड़ी में एसएसपी जे. रविंद्र गौड ने अलीगंज, विकासनगर, गाजीपुर, गुडंबा, मड़ियांव और हसनगंज पुलिस को इन कर्मचारियों को गिरफ्तार करने को कहा है।
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