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अब यूपीएसआईडीसी की जमीन बेच रही आईएफसीआई

Sat, 23 Mar 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। यूपीएसआईडीसी ने अपट्रॉन को देवा रोड पर फैक्ट्री के लिए लीज पर जो जमीन दी थी वह बिकने वाली है। अपट्रॉन से कर्ज वसूलने वाली कंपनी ने टेंडर नोटिस जारी कर तारीख भी तय कर दी है। हालांकि इसे लेकर यूपीएसआईडीसी में कोई हलचल नहीं है। बैंक की जमीन बिक्री प्रक्रिया में वह अभी कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा। जब जमीन खरीदने वाला उसके पास लीज ट्रांसफर के लिए आएगा तब वह उसे अपनी लीज की शर्तों की कसौटी पर कसेगा। आईएफसीआई (इंडस्ट्रियल फाइनेंस कारपोरेशन ऑफ इंडिया) बैंक अपट्रॉन से 140 करोड़ रुपए का कर्ज वसूल करने के लिए अब यूपीएसआईडीसी द्वारा अपट्रॉन को लीज पर दी गई 9.82 एकड़ जमीन बेचने जा रहा है। बैंक ने इसकी आरक्षित कीमत 12 करोड़ 87 लाख 90 हजार रुपये तय की है। इसके लिए बैंक ने टेंडर नोटिस भी जारी कर दी है। टेंडर खोलने के लिए 26 अप्रैल की तारीख तय की गई है। चिनहट के देवां रोड पर इंडस्ट्रियल एरिया में यूपीएसआईडीसी का प्लॉट नंबर-1 अपट्रॉन के पास 30 की साल की लीज पर है। यूपीएसआईडीसी ने इस जमीन की लीज अपट्रॉन को 1984 में की थी। इसकी अवधि 2014 में पूरी हो रही है। बैंक से कर्ज लेने के लिए अपट्रॉन ने इस जमीन को लीज पर लेने के बाद बैंक के पास बंधक रखकर कर्जा लिया था लेकिन उसे अभी तक अदा नहीं किया। अब आईएफसीआई बैंक अपना कर्ज वसूलने के लिए इसे बेचने जा रहा है। गौरतलब हो कि इसी माह एक मार्च को बैंक ने नगर निगम से अपट्रॉन को लीज पर दी गई 2,17,936 वर्गफुट जमीन 74.50 करोड़ रुपए में बेच दी थी। नगर निगम की आपत्ति के बाद ये सारा मामला विवादित हो गया। इसके बाद हाईकोर्ट ने जमीन की नीलामी प्रक्रिया पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
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इस बार बताया लीज की है जमीन ः नगर निगम की जमीन बेचने पर हुए कानूनी विवाद के बाद अब आईएफसीआई सतर्क हो गया है। यूपीएसआईडीसी की जमीन बेचने के लिए बैंक ने जो टेंडर नोटिस जारी की है उसमें बैंक ने यह साफ कर दिया है कि यह जमीन लीज की है। अपट्रॉन को दी गई नगर निगम की जमीन बिक्री मामले में बैंक की वैसे भी काफी किरकिरी हो चुकी है।
फैक्ट्री में बनते थे डाटा कंट्रोल सिस्टम ः अपट्रॉन की देवा रोड चिनहट इस फैक्ट्री में डीसीएस (डाटा कंट्रोल सिस्टम) बनाने का काम होता था। इस फैक्ट्री में बने डाटा कंट्रोल पैनल विदेशों तक जाते थे। यह फैक्ट्री बंद नहीं होती मगर सरकार ने कभी इसके पुनर्निर्माण पर ध्यान ही नहीं दिया। अपट्रॉन कर्मचारी नेता एनएनपी शर्मा का कहना है कि इस फैक्ट्री से 450 कर्मचारियों के परिवारों का भरण पोषण होता था। लेकिन दो दशक से यह फैक्ट्री बंद पड़ी है।
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