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हिंदी वालों के लिए मुश्किल हुई नौकरशाही की राह

Mon, 11 Mar 2013 05:31 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। नौकरशाही का सपना पाले हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों की डगर और कठिन हो गई है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा के पैटर्न में जो बदलाव किए हैं, वह इसमें शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के बड़े तबके पर भारी पड़ने वाली है। अंग्रेजी के बढ़े वेटेज और सामान्य अध्ययन के व्यापक हुए दायरे ने कोचिंग संस्थानों की तो बांछें खिला दी हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के अभ्यर्थियों को मायूस किया है। दूसरी ओर सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा में 2011 में एप्टीट्यूड टेस्ट (सी-सैट) लागू होने के बाद से ही हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों की सफलता दर घट गई है।
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सिविल सेवा की वर्ष 2013 की परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। इसमें हुए बदलावों का विशेषज्ञ विरोध कर रहे हैं। इससे पहले यूपीएससी ने वर्ष 2011 में सी-सैट लागू किया था। इस परीक्षा के आंकड़े देखें तो 2010 के मुकाबले मुख्य परीक्षा में हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों की भागीदारी 60 प्रतिशत से भी ज्यादा घटी है। ग्रामीण क्षेत्र के अभ्यर्थियों की बात करें तो 2009 में जहां सफल अभ्यर्थियों में इनका हिस्सा 48.28 प्रतिशत था वहीं 2011 में यह घटकर 29.55 प्रतिशत पर आ गया। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी से जुड़े पवन मिश्रा कहते हैं कि 2010 में उन्होंने आरटीआई के तहत यूपीएससी से हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों की सफलता के बारे में जानकारी मांगी थी। चौंकाने वाला तथ्य यह था कि महज अंग्रेजी क्वालीफाइंग होने पर भी हिंदी माध्यम के 15 प्रतिशत अभ्यर्थियों की मुख्य परीक्षा की कॉपी इसलिए नहीं जांची गई क्योंकि वे अंग्रेजी के पेपर में फेल हो गए थे। जब आसान पेपर में मुश्किलें इस कदर थीं तो अब 100 अंक मेरिट में जुड़ने के बाद तो हिंदी माध्यम व ग्रामीण परिवेश के अभ्यर्थियों की राह और कठिन होनी है। आईएएस में चयनित हो चुके सत्येंद्र पटेल कहते हैं कि यूपीएससी ने बदलाव की घोषणा भी बहुत देर में की है। मई में प्रारंभिक परीक्षा है और अक्टूबर में मुख्य परीक्षा संभावित है। अब जिन अभ्यर्थियों का इस बार आखिरी मौका है, उनके पास नए सिलेबस की तैयारी का समय ही नहीं होगा।


मुख्य परीक्षा में ऐसा हुआ बदलाव

भाषा
पहले : निबंध के 200 अंक के प्रश्न-पत्र के साथ ही इंग्लिश और किसी एक अन्य भारतीय भाषा का पेपर होता था। भाषा के पेपर केवल क्वालीफाइंग थे और उनके अंक मेरिट में नहीं जोड़े जाते थे।
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अब: 200 के निबंध के पेपर के साथ ही 100 अंक का अंग्रेजी कॉम्प्रीहेंशन का पेपर होगा। इसका स्तर 10वीं बताया गया है। इंग्लिश के ये अंक मेरिट का हिस्सा होंगे।

सामान्य अध्ययन
पहले : सामान्य अध्ययन के दो पेपर होते थे। हर पेपर 300 अंकों का होता था।
अब : सामान्य अध्ययन के चार पेपर होंगे। हर पेपर 250 अंकों का होगा। इसका सिलेबस बढ़ाया गया है। मानविकी से लेकर अद्यतन घटनाएं सिलेबस का हिस्सा बनी हैं।

वैकल्पिक विषय
पहले : मुख्य परीक्षा में अभ्यर्थी को दो विषय चुनने होते थे। हर पेपर में 300-300 अंक के दो-दो पेपर होते थे।
अब : वैकल्पिक विषय की संख्या घटाकर एक कर दी गई है। अब 250-250 अंक के दो पेपर होंगे। अहम बात ये है कि साहित्य या भाषा को विषय के रूप में वही चुन सकेगा जिसने उस भाषा या साहित्य को मुख्य विषय रखते हुए स्नातक किया है। ऐसे में साइंस, कॉमर्स, इंजीनियरिंग आदि पृष्ठभूमि के अभ्यर्थियों की सिविल सेवा में इस विषय को चुनने की गुंजाइश खत्म हो गई। परीक्षा का माध्यम भी हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कोई अन्य भाषा तभी हो सकती है जब अभ्यर्थी ने उसी भाषा माध्यम से पढ़ाई की हो।

साक्षात्कार : इसके लिए पहले 300 अंक निर्धारित थे जिसे अब घटाकर 275 कर दिया गया है।

सिविल सेवा में यूपी की हिस्सेदारी
वर्ष पद मुख्य परीक्षा में हिस्सेदारी चयनित
2010 921 2739 84
2009 875 2541 105
2008 791 3387 103
2007 638 2569 95


सी-सैट के बाद मुख्य परीक्षा में हिंदी माध्यम की स्थिति (वर्ष 2010/2011)
पेपर हिंदी माध्यम अंग्रेेजी माध्यम
निबंध 4156/1682 7329/9203
सामान्य अध्ययन-1 4194/1700 7371/9316
सामान्य अध्ययन-2 4174/1695 7352/9247


वैकल्पिक विषय के रूप में भाषा
वर्ष सफल अभ्यर्थी (प्रतिशत में)
2010 10.2
2009 12.5
2008 11.1
2007 8.7
2006 8.2

(नोट : सभी आंकड़े यूपीएससी की वार्षिक रिपोर्ट पर आधारित।)

कोट्स
अंग्रेजी की अनिवार्यता गलत
सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा में अंग्रेजी की अनिवार्यता हिंदी माध्यम एवं ग्रामीण क्षेत्र के अभ्यर्थियों पर भारी पड़ेगी। खासकर सिविल सेवा में एक-एक अंकों से बनती मेरिट में होने वाले बदलावों के चलते भी यह समस्या अधिक है। जो सरकार यह व्यवस्था लागू कर रही है, ग्रामीण क्षेत्रों के उसके ही स्कूलों में छठीं क्लास से अंग्रेजी पढ़ाई जाती है। ऐसे में यह बदलाव तार्किक नहीं है।
प्रशांत शुक्ला, आईएएस-2010 में 323वीं रैंक

अव्यावहारिक परिवर्तन
यह सही है कि आज के दौर में सिविल सेवा की जॉब प्रोफाइल में अंग्रेजी की अनिवार्यता बढ़ी है लेकिन देश की शैक्षिक और सामाजिक पृष्ठभूमि को देखते हुए सिविल सेवा में सबके लिए समान मौके होने चाहिए। ऐसे में मुख्य परीक्षा के पैटर्न में बदलाव अव्यावहारिक है। शैक्षिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े पृष्ठभूमि के अभ्यर्थियों की समस्या भी बढ़ेगी। सामान्य अध्ययन का बढ़ा दायरा भी कोचिंग सेंटरों की भूमिका बढ़ाएगा।
सत्येंद्र पटेल, आईएएस-2011 में 362वीं रैंक

पिछड़ेंगे हिंदी माध्यम के परीक्षार्थी
पहले अंग्रेजी केवल क्वालीफाइंग थी। तब भी हिंदी माध्यम के अभ्यर्थी पिछड़ जाते थे। अब इसके 100 अंक मेरिट में जोड़े जाएंगे। यह हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों की दिक्कतें बढ़ाएगा। सिविल में एक अंक से 20 रैंक तक मेरिट खिसकती है। अंग्रेजी के 100 अंक हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थियों के बीच लगभग 35-40 अंकों का अंतर पैदा करेंगे जिसकी भरपाई मुश्किल होगी। सामान्य अध्ययन का बढ़ा दायरा भी पुराने अभ्यर्थियों के लिए इतना जल्दी कवर करना आसान नहीं होगा।
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शशांक प्रताप सिंह, आईएएस 2012 में साक्षात्कार के लिए चयनित
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