लखनऊ। बायो मेडिकल वेस्ट के बेहतर निस्तारण के लिए किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी को विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूएन डेवलपमेंट प्रोग्राम द्वारा अवॉर्ड के लिए चुना गया है। अवॉर्ड मंगलवार को केजीएमयू के साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में होने वाले ग्लोबल हैल्थकेयर वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट की राष्ट्रीय सूचना प्रसार वर्कशॉप में दिया जाएगा।
अवॉर्ड को लेकर केजीएमयू बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट कमेटी और मेडिकल स्टाफ खासा उत्साहित है। खास बात यह है कि केजीएमयू (तब सीएसएमएमयू) में ढाई साल पहले तक जैविक कचरे के निस्तारण के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। इतने कम समय में व्यवस्था करने और फिर सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठन से अवॉर्ड मिलना अपने आप में गौरव की बात है।
पहले के हालात
बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट कमेटी से जुड़े डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि ढाई वर्ष पहले तक कचरा प्रबंधन के लिए न फंड था और न ही कोई योजना। चिकित्सक और अन्य मेडिकल स्टाफ संक्रमित कचरे को साफ करना सफाईकर्मियों का काम मानता था। इसके लिए कर्मचारियों को कोई ट्रेनिंग तक नहीं दी गई थी। इसके चलते अक्सर संक्रमित कचरे से भरे थैले-थैलियां और डिब्बे खुले में बिखरे रहते थे। संक्रमित द्रव्य भी अस्पताल के फर्श पर फैल जाता था। अस्पताल के कचरे को खुले गड्ढे में डाल दिया जाता। इससे संक्रमण का खतरा बना रहता।
और अब की तस्वीर
डॉ. सुधीर के अनुसार अब केजीएमयू में बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया जा रहा है। इसमें पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और वन मंत्रालय ने भी सहयोग किया। संक्रमित चीजों और कचरे को अलग रखने की विधि लागू की गई है। इसके अलावा ऑटो-क्लेव मशीनरी लगाई गई, जिसके जरिए विभिन्न संक्रमित तत्वों को बैक्टीरिया व फंगस रहित किया जा रहा है। इससे इन वस्तुओं को जहां फिर से उपयोग में लाया जा सकता है तो वहीं पर्यावरण को भी कचरा नुकसान नहीं पहुंचाता।